देहरादून, जेएनएन। पूर्वा सांस्कृतिक मंच की ओर से देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जयंती सप्ताह धूमधाम से मनाया गया। समारोह के समापन पर मंच की ओर से रेलवे के मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक संजय अमन को पहला डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृत्ति सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर मंच ने केंद्र सरकार से मांग की कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर तीन दिसंबर को जीनियस स्टूडेंट डे घोषित किया जाए। 

रविवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब के निकट स्थित एक रेस्टोरेंट में जयंती समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओएनजीसी के पूर्व कार्यकारी निदेशक आलोक मिश्र, अति विशिष्ट अतिथि कार्यकारी अध्यक्ष डॉक्टर लालिमा वर्मा और योगंबर दत्त बड़थ्वाल आदि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पूर्वा सांस्कृतिक मंच के कार्यकारी अध्यक्ष ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जीवनी पर प्रकाश डाला। महासचिव सुभाष झा ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद के योगदान को भुला दिया गया। 

यहां तक कि भारत के संविधान के निर्माण के लिए गठित संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र ही थे। इसका कारण सिर्फ यही है कि वह राजनीति में सिद्धात, नैतिकता और सुचिता के पक्षधर थे। इस मौके पर स्कूली छात्रों ने भी अपने विचार रखे। कवि बुद्धिनाथ मिश्र ने मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधन दिया। पूर्वा सास्कृतिक मंच ने इस वर्ष से डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद स्मृति पुरस्कार से देने का फैसला लिया। 

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इस बार मंच की कार्यकारिणी ने मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक, देहरादून (उत्तर रेलवे) संजय अमन इस पुरस्कार से सम्मानित किया। संजय अमन के साथ सबसे खास बात यह है कि वे डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के गाव जिरादेई (सिवान, बिहार) के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा शाहजहापुर यूपी में हुई। इस अवसर पर संजय झा, शैलेंद्र सिंह, नूतन स्मृति, डॉक्टर अमन झा, डॉक्टर निवेदिता झा, संदीप प्रजापति, गौतम पणित आदि मौजूद रहे।

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