देहरादून, जेएनएन। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि स्कूलों में सुरक्षा हर बच्चे का विशेषाधिकार है। प्रदेश सरकार इसके लिए लगातार काम कर रही है। सीड्स संस्था और हनीवेल सेफ स्कूल प्रोग्राम के साथ हुए करार के तहत दून के साथ ही हरिद्वार के 100 स्कूलों में बच्चों-शिक्षकों को व्यावसायिक तरीके से आपदा प्रबंधन और आपदा से पूर्व की तैयारियों की जानकारी दी जाएगी। 

बुधवार को पथरीबाग स्थित श्री लक्ष्मण विद्यालय इंटर कॉलेज में सीड्स संस्था और सरकार के बीच हुए करार की आधिकारिक घोषणा हुई। करार के तहत सीड्स संस्था अपने स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम में दून व हरिद्वार के 100 सरकारी स्कूलों के 31,000 छात्रों, 50,000 अभिभावकों और 700 शिक्षकों को स्कूल सुरक्षा का पाठ पढ़ाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रदेश में आपदा को गंभीरता से साल 1992 के उत्तरकाशी भूकंप के बाद से लिया गया।

आपदा जोखिम में कमी लाने के लिए सीड्स का यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हनीवेल इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अक्षय बेलारे ने कहा कि हनीवेल सेफ स्कूल्स प्रोग्राम राष्ट्रीय स्कूल सुरक्षा नीति और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर स्कूलों में सुरक्षा कार्यक्रम लागू करता है। उत्तराखंड में इसे लागू करना हनीवेल के लिए सौभाग्य की बात है। 

खेल-खेल में सीखा आपदा प्रबंधन 

बुधवार को कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्रों के लिए सेफ्टी फस्र्ट कार्निवल का आयोजन भी किया गया। स्कूल के मैदान में लगे स्टाल में खेल-खेल में बच्चों को आपदा प्रबंधन और आपदा की तैयारियों के लिए प्रयोगात्मक तरीके से बताया गया। 

रामबाबू बने बच्चों के प्रेरणास्रोत 

कार्यक्रम में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने का संदेश दे रहे राम बाबू बच्चों का प्रेरणास्रोत बने। सीड्स संस्था से जुड़े राम बाबू ने एक हाथ नहीं होने के बावजूद कागज की लुगदी से गिलास, प्लेट, सजावटी सामान तैयार कर बच्चों को प्रेरित किया। बाद में बच्चों ने भी उनसे सीख लेकर लुगदी से कप और प्लेट बनाकर अपना योगदान दिया। 

दून- हरिद्वार के 66 फीसदी स्कूलों में सुरक्षा यंत्र ही नहीं 

राजधानी के स्कूल सुरक्षा ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं। दून-हरिद्वार के 66 फीसदी स्कूलों में अग्निशमन यंत्र और कॉल बटन जैसे सुरक्षा उपकरण तक नहीं हैं। 77 प्रतिशत स्कूलों में आपातकालीन निकास नहीं है या आपातकालीन निकास का संकेत नहीं बने हैं। सीड्स ने बुधवार को प्रदेश में अपने कार्यक्रम के लांच पर ये चौंकाने वाले आंकड़े  पेश किए। 

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सीड्स जिन 100 सरकारी स्कूलों में अपना सुरक्षा कार्यक्रम लागू करने जा रही है। इन स्कूलों में कार्यक्रम लागू करने से पहले संस्था ने यहां की मुख्य सुरक्षा समस्याओं की जानकारी के लिए सर्वे किया। संस्था ने 100 स्कूलों में लागू सुरक्षा व्यवस्थाओं को इनमें पढ़ रहे 31 हजार बच्चों पर सर्वे के आधार पर रिपोर्ट जारी की है। सीड्स के सह-संस्थापक डॉ. मनु गुप्ता ने बताया कि शोध में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया कि 71 फीसदी बच्चे अकेले ही स्कूल जाते हैं। 30 प्रतिशत बच्चे जानवरों के हमलों के डर के साथ स्कूल जाते हैं।

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25 फीसदी में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर डर बैठा हुआ है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत बहुत खराब है। 49 प्रतिशत स्कूलों में बच्चों को या तो स्कूल जाने के दौरान या स्कूल परिसर में भूस्खलन का खतरा रहता है। 40 फीसद स्कूल भवनों को बहुत अधिक ऊंचाई के कारण संरचनात्मक जोखिम का सामना करना पड़ता है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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