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देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में अब रोटा वायरस वैक्सीन निश्शुल्क मिलेगी। बाकी टीकों के साथ छह हफ्ते, दस हफ्ते और 14 सप्ताह के बच्चों को इसकी पांच-पांच बूंदें पिलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एक कार्यक्रम में वैक्सीन लॉन्च करेंगे। 

स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एनएचएम मिशन निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि गंभीर डायरिया से सुरक्षा के लिए रोटा वायरस वैक्सीन को अभी तक देश के 11 राज्यों में दिया जा रहा है। अब उत्तराखंड में भी यह वैक्सीन नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में यह वैक्सीन अनुमानित 1,83,008 शिशुओं को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डायरिया से होने वाली शिशु मृत्यु दर दो प्रतिशत है और प्रतिवर्ष देश के एक लाख बच्चों की मृत्यु का कारण डायरिया है।

डायरिया होने के अलग-अलग कारण हैं, लेकिन रोटा वायरस से होने वाला डायरिया अत्यंत गंभीर है, जिससे बचाव के लिए रोटा वायरस वैक्सीन एकमात्र उपाय है। बताया कि यह वैक्सीन पोलियो ड्रॉप की तरह दी जाएगी। वर्तमान में केवल निजी चिकित्सालयों/क्लीनिक पर वैक्सीन दी जा रही है। उन्होंने बताया कि रोटा वायरस डायरिया की वजह से एक बार चिकित्सालय में भर्ती होने पर व्यक्ति पर 2000-8400 रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता है। निम्न वर्गीय परिवार को यह गरीबी की तरफ धकेल देता है। कहा कि रोटा वायरस वैक्सीन के कारण शिशु में होने वाले रुग्णता और मृत्यु को 74 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसलिए यह वैक्सीन शिशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है। 

अपने बच्चे को कल जरूर भेजें स्कूल 

बच्चों में कृमि संक्रमण से बचाव व नियंत्रण के लिए आठ अगस्त को प्रदेश में कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। इस दिन 42.77 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा यानी एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। इनमें निजी स्कूलों में अध्ययनरत 12.44 लाख बच्चे भी शामिल हैं। वहीं स्कूल न जाने वाले 9.38 लाख बच्चों को भी इस मुहिम में शामिल किया गया है। बता दें, इसी साल फरवरी में 32.44 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाई गई थी। 

एनएचएम के मिशन निदेशक डॉ. युगल किशोर पंत ने मंगलवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में पत्रकारों से वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बुधवार को इस अभियान की शुरुआत करेंगे। कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य एक से 19 साल तक के सभी बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण व जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उन्हें कृमि मुक्त करना है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में कृमि संक्रमित बच्चों की दर 68 प्रतिशत है। यह कार्यक्रम प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग व समेकित बाल विकास सेवाओं के सहयोग से सभी जिलों में आयोजित किया जाएगा। सभी स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में आठ अगस्त को बच्चों को एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। यदि कोई बच्चा दवा खाने से छूट जाता है तो उन्हें 16 अगस्त को मॉपअप दिवस पर दवा खिलाई जाएगी। इस दौरान स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरके पांडेय, एनएचएम निदेशक डॉ. अंजली नौटियाल आदि उपस्थित रहे। 

सुरक्षित है एल्बेंडाजोल 

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरके पांडेय ने बताया कि कृमि नियंत्रण की दवा सभी के लिए सुरक्षित है। कुछ गंभीर संक्रमण वाले बच्चों में दवा खाने के बाद जी मिचलाना, पेट में हल्का दर्द, उल्टी-दस्त और थकान आदि की समस्या हो सकती है। इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए भी पूरी तैयारी की गई है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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