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देहरादून, राज्य ब्यूरो। चारधाम यात्रा व पर्यटन सीजन शुरू होने वाला है और शासन ने सड़क सुरक्षा के लिए केवल पांच करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए हैं। हैरत यह कि सड़क सुरक्षा के लिए चालान की 25 फीसद राशि जो सड़क सुरक्षा कोष में जानी थी, उसे पुलिस और लोक निर्माण विभाग के साथ बांट दिया गया। जो राशि सड़क सुरक्षा कोष के लिए दी गई है वह ऊंट के मुंह में जीरा समान बन कर रह गई है।

देश भर में हो रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हर राज्य में जिला स्तर तक सड़क सुरक्षा परिषद व समितियों का गठन किया गया था। उत्तराखंड में भी इनका गठन किया गया। सड़क सुरक्षा संबंधी कार्यो को गति देने के लिए सड़क सुरक्षा कोष भी बनाया गया।

 कोष में धन की व्यवस्था करने के लिए यह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति ने नियम बनाया गया कि पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा किए जाने वाले चालान का 25 प्रतिशत इस कोष में जमा किया जाएगा। इस बार पुलिस व परिवहन विभाग ने तकरीबन 56 करोड़ रुपये के चालान काटे। इनका 25 फीसद 14 करोड़ रुपये बैठता है। यह राशि सड़क सुरक्षा कोष में जमा की जानी थी। परिवहन विभाग की ओर से 12.5 करोड़ का प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका था। 

इसमें चारधाम यात्रा के मद्देनजर सड़क सुरक्षा की तैयारियों को लेकर बजट की मांग की गई थी। बावजूद इसके विभाग को इसके सापेक्ष केवल पांच करोड़ रुपये ही सड़क सुरक्षा कोष के लिए जारी किए गए। सूत्रों की मानें तो शेष नौ करोड़ रुपये पुलिस और लोक निर्माण विभाग को आवंटित कर दिए गए। अब परिवहन विभाग को इसी पांच करोड़ रुपये से सड़क सुरक्षा के कार्यो को गति देनी है। 

दरअसल, सड़क सुरक्षा के तहत सीसी कैमरे, स्पीड रडार गन का क्रय, एल्कोमीटर की खरीद, क्रेन खरीद, जागरूकता कार्यक्रम, जगह-जगह साइनेज लगाना और सबसे अहम दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को आपात स्थिति में शीघ्र ठीक कराना होता है। अब स्थिति यह बन रही है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सड़क संबंधी सारे काम पीडब्लूडी को अपने खर्चे से करने होंगे। विभागीय अधिकारी इस बात को स्वीकार तो कर रहे हैं लेकिन खुलकर बोलने को कोई तैयार नहीं है।

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