देहरादून, [विकास गुसाईं]: प्रदेश सरकार सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने की दिशा में कदम उठा रही है। इस परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत आने से इसमें धनराशि की कोई कमी नहीं रहेगी। इससे यह परियोजना तय समय पर पूरी की जा सकती है। इसके लिए स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष इस मसले को रखेंगे। 

प्रदेश में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक बनने वाले रेल लाइन को विकास की धुरी के रूप में देखा जा रहा है। टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग व चमोली जिलों से गुजरने वाली 126 किमी लंबी इस परियोजना में 12 रेलवे स्टेशन, 17 टनल व 36 पुल बनाए जाने प्रस्तावित हैं। इसके लिए रेल मंत्रालय ने 16216 करोड़ रुपये भी स्वीकार कर लिए हैं। इस परियोजना के बनने से न केवल पलायन थमने की कल्पना की जा रही है बल्कि प्रदेश के बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे तीर्थ स्थलों के लिए पर्यटकों को यातायात का एक सुरक्षित साधन मिल सकेगा।

 इस रेल लाइन के बनने से देवप्रयाग, श्रीगनर, रुद्रप्रयाग, गौचर व कर्णप्रयाग को भी नया रूप मिलेगा। इस परियोजना को लेकर कुछ समय पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश की सामाजिक व आर्थिक दृष्टि के महत्व की इस योजना का आंकलन लागत और लाभ के आधार पर नहीं हो सकता। 

चूंकि इस योजना को सात वर्षों में पूरा किया जाना है, इसके लिए निरंतर पैसों की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में स्वीकृत कराए जाने से धन की कोई कमी नहीं रहेगी। सूत्रों की मानें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने खुद इस परियोजना का प्रस्तुतिकरण प्रधानमंत्री के सामने कर इसे राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करवाने के लिए प्रयास करने की बात कही है।

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Edited By: Sunil Negi