केदार दत्त, देहरादून। विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में दो नए मेहमान आ रहे हैं। मेहमान भी ऐसे, जिन्हें परिवार का सदस्य बनाने की तैयारी है। जी हां, बात सोलह आने सच है। कार्बेट टाइगर रिजर्व में गैंडे और राजाजी में वाइल्ड डॉग के लिए 'कार्पेट' बिछ रहा है। दरअसल, एक दौर में कार्बेट में गैंडों की बसागत थी, मगर बाद में ये विलुप्त हो गए। वन महकमे के अभिलेख इसकी तस्दीक करते हैं। खैर, अब फिर से यहां इनका संसार बसाने की मुहिम शुरू की गई है। राजाजी रिजर्व को लें तो उससे लगे क्षेत्रों में गुलदार, जंगली सूअरों ने लोगों की नाक में दम किया है। इसके तोड़ के रूप में वाइल्ड डॉग लाए जा रहे हैं, जो गुलदार, जंगली सूअरों पर प्राकृतिक रूप से नियंत्रण में मददगार हैं। बात जो भी हो, दोनों रिजर्व में आने वाले दिनों में नए मेहमान पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। 

120 गैंडों की है क्षमता 

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में गैंडों की फिर से बसागत को किए गए अध्ययन के अनुसार वहां 120 गैंडों को रखने की क्षमता है। योजना के मुताबिक पहले चरण में कार्बेट में नेपाल या असोम से 12 गैंडे लाए जाएंगे। इनमें चार नर और आठ मादा होंगे। धीरे-धीरे इनकी संख्या में इजाफा किया जाएगा। रेडियो कॉलर से इनकी निगरानी होगी। आकलन है कि गैंडों की बसागत के मद्देनजर तीन साल के प्रोजेक्ट पर रकम भी सिर्फ 4.3 करोड़ ही खर्च होगी। इसमें भी 1.5 करोड़ रुपये का खर्च तो इन्हें यहां लाने पर ही आएगा। कोशिश ये है कि गैंडों को इसी साल यहां लाया जाए। गैंडों का संसार बसने से कार्बेट की जैव विविधता का संरक्षण भी होगा और इनसे मानव के साथ संघर्ष की समस्या न के बराबर रहेगी। यही नहीं, गैंडे थल और जल दोनों में रहते हैं। ऐसे में कॉर्बेट में बारहसिंघों को बसाने में मदद मिलेगी। 

हिमालयन सिराऊं भी बना कौतुहल 

वन्यजीव विविधता के मामले में धनी उत्तराखंड के जंगलों की सेहत फिलवक्त ठीक है। यहां के वासस्थल वन्यजीवों के लिए मुफीद साबित हो रहे हैं। अक्सर नजर आने वाली दुर्लभ वन्यजीवों की प्रजातियां तो यही संकेत दे रहीं। इनमें एक नया नाम जुड़ा है हिमालयन सिराऊं का। विभाग की सूची में दुर्लभ वन्यजीव के रूप में दर्ज सिराऊं ने अब कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व के मध्य लैंसडौन वन प्रभाग के बाद राजाजी में भी कौतुहल बढ़ाया है।

बेहद शर्मीले हिरन प्रजाति के इस जीव को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन (आइयूसीएन) ने 'संकटापन्न के नजदीक' श्रेणी में शामिल किया है। बेहद घने जंगल में रहने वाला सिराऊं राजाजी टाइगर रिजर्व में भी देखा गया है। इसकी मैदानी क्षेत्रों में मौजूदगी से साफ है कि यहां के संरक्षित और आरक्षित क्षेत्र के जंगल स्वस्थ हैं। यह एक शुभ संकेत है। जाहिर है अब सिराऊं के संरक्षण को प्रभावी कार्ययोजना तैयार होगी। 

यह भी पढ़ें: देहरादून में है जहरीले से लेकर शाकाहारी सांपों का अद्भुत संसार, जानिए इनकी खासियत

दो बाघिनों को मिलेंगे साथी 

राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण को लेकर उत्तराखंड ने लंबी छलांग भरी है। संख्या के लिहाज से 442 बाघों के साथ उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है। इस पर रश्क करना तो बनता है, लेकिन एक क्षेत्र ऐसा भी है, जहां बाघिनें एकाकी जीवन जीने को विवश हैं। यह है राजाजी टाइगर रिजर्व का पश्चिमी क्षेत्र, जहां लंबे समय से सिर्फ दो बाघिनों की मौजूदगी है। इससे इनके कुनबे में इजाफा नहीं हो पाया है।

यह भी पढ़ें: मनोरंजन के साथ ज्ञान का केंद्र बनेगा देहरादून जू, पढ़िए पूरी खबर 

वजह है, राजाजी के दूसरे क्षेत्र से यहां बाघों का आवागमन न हो पाना। हालांकि, वहां बाघों को छोड़ने की योजना है, मगर यह अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। यहां कॉर्बेट समेत अन्य क्षेत्रों से पांच बाघ, दो नर और तीन मादा लाने के प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण पहले ही मंजूरी दे चुका है। उम्मीद है इस वर्ष राजाजी में बाघों को शिफ्ट करने की यह मुहिम आकार लेगी। 

यह भी पढ़ें: कड़ाके की ठंड में बदला वन्य जीवों का डाइट चार्ट Dehradun News

Posted By: Raksha Panthari

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस