संवाद सूत्र, कालसी: हरिपुर-कालसी स्थित यमुना के हरी घाट पर मकर संक्रांति को महायज्ञ व विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया। हरिपुर को पौराणिक स्वरूप में लाने को लोक पंचायत सदस्य भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत पिछले तीन साल से मकर सक्रांति पर विशेष अनुष्ठान कराया जा रहा है।

लोक पंचायत जौनसार समिति ने हरिपुर-कालसी में सोमवार को यमुना के हरि तट पर मकर संक्रांति पर महायज्ञ व विशाल भंडारे का आयोजन किया। यमुना की अविरल धारा को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखने और हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करने के लिए यमुना ध्वज के सामने संकल्प लिया गया। यज्ञ में 21 पंडितों व आचार्य ने आहुतियां डाली। श्रद्धालुओं ने यमुना जी की धर्म ध्वजा पर आरती के साथ पूजा की। मथुरा वृंदावन से आए व्यास विजय कृष्ण महाराज ने कहा कि यमुना के दर्शन व आचमन करने से ही सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यमुना जी का चतुर्थ विवाह हरिपुर में ही हुआ था। चार महत्वपूर्ण नदियों के संगम स्थल कालसी के हरिपुर में यमुना का इतिहास रामायण काल की घटना से जुड़ा है। हरिपुर कालसी को कल्प ऋषि की तपस्थली भी मान जाता है। लोक पंचायत के संयोजक श्रीचंद शर्मा ने कहा कि हरिपुर के यमुना तट पर रामायण काल के इतिहास से जुड़ी यमुना, टौंस, अमलावा व नौरो नदियों का संगम है। किवदंती है कि रामायण काल में इस क्षेत्र को यमुना देश भी कहा जाता था। साथ ही यहां पर कालसी में सम्राट अशोक की शिला लेख है। भंडारे की व्यवस्था केसर ¨सह नेगी की ओर से की गई। इस मौके पर लोक पंचायत सदस्य भारत चौहान, आचार्य विपिन जोशी, संजीव जोशी, शिवानंद उनियाल, नीरज भट्ट, कपिल भट्ट, शुभम शर्मा, साधु राम शर्मा, प्रधान अमला चौहान, लोक पंचायत के शूरवीर तोमर, केसर नेगी, राजेंद्र चौहान, आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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