देहरादून, केदार दत्त। जैव विविधता के लिए मशहूर 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में अब जैव विविधता संरक्षण से संबंधित अनुसंधान कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं रहेगी। साथ ही इन कार्यों में तेजी आएगी और राज्य के परिप्रेक्ष्य में भरोसेमंद बेसलाइन डेटा भी मिल सकेगा। इस सिलसिले में शासन ने वन विभाग के अंतर्गत 'सेंटर फॉर रिसर्च डेवलपमेंट एंड कंजर्वेशन ऑफ हिमालयन फॉरेस्ट्री रिसोर्सेज' के गठन को हरी झंडी दे दी है। स्वायत्त निकाय अथवा प्राधिकरण के रूप में गठित होने वाली अपनी तरह की यह पहली सोसायटी सरकारी व निजी उपक्रमों से सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी) के तहत फंड जुटाएगी। 

वन संपदा के अनुसंधान की उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं। इसमें जैव विविधता संरक्षण, उत्पादक क्लोन का विकास, दुर्लभ प्रजातियों के नर्सरी तकनीक का मानकीकरण, हिमालयी प्रजातियों की राज्य में उपयुक्तता का अध्ययन, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव जैसे बिंदु शामिल हैं। बावजूद इसके इन अहम विषयों पर गुणात्मक अनुसंधान के लिए उपयुक्त वित्तीय, मानवीय और वैज्ञानिक ढांचा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, वन महकमे में अनुसंधान वृत्त है, मगर वह भी दिक्कतों से जूझ रहा है। 

इसे देखते हुए वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त संजीव चतुर्वेदी की ओर से करीब सवा दो माह पहले राज्य में गुणवत्तायुक्त अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सोसायटी के गठन का प्रस्ताव भेजा गया। शासन स्तर पर गहन मंथन के बाद अब विभाग के अंतर्गत सेंटर फॉर रिसर्च डेवलपमेंट एंड कंजर्वेशन ऑफ हिमालयन फॉरेस्ट्री रिसोर्सेस के गठन को झंडी दे गई दी है। 

इस सिलसिले में संयुक्त सचिव आरके तोमर की ओर से प्रमुख वन संरक्षक को पत्र भेजा है। कहा गया है कि सोसायटी के गठन से राज्य पर किसी प्रकार का वित्तीय व प्रशासनिक भार नहीं पड़ेगा। सरकारी एवं निजी उपक्रमों से सीएसआर के तहत मदद ली जाएगी। यही नहीं, सोसायटी के ढांचे में राजकीय सेवा के अफसर बतौर पदेन कार्य करेंगे। 

सोसायटी के उद्देश्य 

-दुर्लभ, लुप्तप्राय एवं संकटापन्न प्रजातियों के संरक्षण को उपयुक्त तकनीक का विकास और नीति निर्धारण में वन विभाग को सलाह 

-जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के साथ ही विभिन्न प्रजातियों के प्रवासन पैटर्न, कार्बन पृथक्करण क्षमता का आकलन 

-हिमालयी क्षेत्र में औषधीय व सगंध पौधों, ईंधन, चारा एवं बांस प्रजातियों के विकास के साथ-साथ आजीविका विकास के मुद्दों पर सामाजार्थिक अध्ययन 

-कृषि वानिकी प्रजातियों के उच्च उत्पादक क्लोन के विकास में विभाग को सहायता, नई प्रजातियों की खोज 

-पड़ोसी हिमालयी राज्यों और देशों में पाई जाने वाली प्रजातियों को उत्तराखंड में प्रचलित करने का प्रयास 

-प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन एवं वनों की धारणीय क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन 

-वन एवं वन्यजीवों के दृष्टिगत अनुसंधान कार्यों में तेजी लाना और विश्वसनीय बेसलाइन डेटा तैयार करना 

यह होगा ढांचा 

सोसायटी में प्रमुख सचिव वन अध्यक्ष और वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त सदस्य सचिव होंगे। सदस्यों में अपर प्रमुख वन संरक्षक अनुसंधान प्रशिक्षण एवं प्रबंधन, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव, निदेशक वन अनुसंधान संस्थान, उपकुलपति जीबी पंत कृषि विवि, अध्यक्ष उत्तराखंड जैव विविधता परिषद, निदेशक जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण एवं विकास संस्थान, निदेशक उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी, मुख्य वन संरक्षक कार्ययोजना, निदेशक भारतीय वन्यजीव संस्थान, वन वर्धनिक नैनीताल व हल्द्वानी शामिल हैं। 

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Posted By: Raksha Panthari

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