देहरादून, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में नहरों के निर्माण की लागत अधिक होने के कारण वर्तमान में 2.50 लाख प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर 3:50 लाख प्रति हेक्टेयर करने का अनुरोध किया। उन्होंने पर्वतीय एवं विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों से पांच प्रतिशत सामुदायिक अशंदान की शर्त को समाप्त करने पर विचार करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कुंभ के मद्देनजर हरिद्वार में एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगान की भी मांग की। 

नई दिल्ली में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पर्वतीय राज्यों के लिए मानकों में परिवर्तन व शिथिलीकरण करने का अनुरोध भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि योजना के अंतर्गत 651 लघु सिंचाई योजना का अवशेष केंद्रांश की धनराशि 63.57 करोड़ की मांग का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। इन योजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए धनराशि अवमुक्त की जाए। 

राज्य की 349.39 करोड़ रुपये की 422 लघु सिंचाई की नई योजनाओं का प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग, आगरा के माध्यम भारत सरकार को भेजा गया है। इसमें 19524 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित करने का प्रस्ताव है। 

उन्होंने इस योजना को स्वीकृत कर वर्ष 2019-20 में रुपये 28.97 करोड़ का केंद्रांश भी अवमु़क्त करने का अनुरोध किया। जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों तथा बिखरी आबादी के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की लागत अधिक आती है।

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इस कारण संपूर्ण लागत का पांच प्रतिशत अंशदान एकत्रित कर पाना व्यवहारिक रूप से अत्याधिक कठिन होता है। इसका प्रभाव योजनाओं की प्रगति पर पड़ता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सुझावों पर समुचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख, अरविंद सिंह ह्यांकी व कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत आदि उपस्थित थे। 

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Posted By: Sunil Negi

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