देहरादून, जेएनएन। राजधानी में अवैध रूप से भू-जल दोहन करने वालों पर प्रशासन सख्त हो गया है। इस संबंध में सूचना आयोग के आदेश पर जल संस्थान सरकारी और निजी भवनों में अवैध बोरिंग पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। विभाग ने अभी तक 50 सरकारी भवनों में भूजल दोहन के लिए की गई अवैध बोरिंग की सूची जिला प्रशासन को सौंप दी है। एसडीएम सदर कमलेश मेहता का कहना है कि 16 अगस्त को अवैध बोरिंग मामलों की समीक्षा है। इसके बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी। 

अवैध भूजल दोहन पर जल संस्थान ने जो सरकारी भवनों की रिपोर्ट दी है, उसमें मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और मसूरी कोतवाली भी शामिल है। इन दोनों कार्यालयों में नियम विरुद्ध बोरिंग कर भू-जल दोहन किया रहा है। इसके अलावा 48 अन्य भवनों और आवासीय कॉलोनी में अवैध भूजल दोहन किया गया है। रिपोर्ट में अवैध भूजल दोहन में हजारों निजी भवन भी शामिल हैं। अवैध बोरिंग मामलों की  समीक्षा के बाद जल संस्थान की संस्तुति पर इनको बंद कराया जा सकता है। इस पर भी प्रशासन मंत्रणा कर रहा है। इसके पीछे भू-जल दोहन को रोकना है। जिलाधिकारी सी रविशंकर पहले ही भू-जल को लेकर गंभीर है। उन्होंने सभी दफ्तरों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग पर काम करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम सदर कमलेश मेहता ने बताया कि इस संबंध में जल संस्थान के साथ मिलकर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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Posted By: Sunil Negi