देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: उत्तराखंड बोर्ड की दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में औसत से कम रिजल्ट देने वाले विद्यालयों में चालू शैक्षिक सत्र में खास जोर दिया जाएगा। इन विद्यालयों में कमजोर बच्चों को चिह्नित कर उपचारात्मक शिक्षण (रेमेडियल टीचिंग) के जरिये मदद दी जाएगी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने ऐसे विद्यालयों में बोर्ड परीक्षाफल में सुधार लाने को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। 

उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में औसत से कम रिजल्ट देने में टिहरी जिला आगे रहा है। जिले के 140 विद्यालयों का परीक्षाफल कम रहा है। इसके बाद हरिद्वार जिले के 139, अल्मोड़ा जिले के 137 विद्यालयों का रिजल्ट कम रहा। इस कड़ी में पांचवें स्थान पर देहरादून जिला है। इस सूची में सबसे निचले यानी न्यून रिजल्ट देने में बागेश्वर जिले को कामयाबी मिली है। इस जिले के सिर्फ 15 विद्यालयों का रिजल्ट औसत उत्तीर्ण प्राप्तांक से कम रहा। 

वहीं हाईस्कूल में औसत से अधिक रिजल्ट देने वाले विद्यालयों की संख्या में पहले स्थान पर पौड़ी जिला रहा है। इस जिले के सर्वाधिक 290 विद्यालयों का रिजल्ट अधिक रहा है। अधिक रिजल्ट देने के मामले में दूसरे स्थान पर 190 विद्यालयों के साथ देहरादून, 176 विद्यालयों के साथ अल्मोड़ा तीसरे, 174 विद्यालयों के साथ टिहरी चौथे और 167 विद्यालयों के साथ नैनीताल पांचवें स्थान पर रहा है।

इंटरमीडिएट के रिजल्ट में औसत से कम रिजल्ट देने में सर्वाधिक 102 विद्यालयों के साथ हरिद्वार फिसड्डी रहा, जबकि 96 विद्यालयों के साथ ऊधमसिंहनगर दूसरे, 87 विद्यालयों के साथ देहरादून तीसरे, 86 विद्यालयों के साथ नैनीताल चौथे और 77 विद्यालयों के साथ टिहरी पांचवें स्थान पर है। वहीं औसत से ज्यादा रिजल्ट देने में पहले पाएदान पर पौड़ी जिला है। जिले के 206 विद्यालयों का रिजल्ट औसत से ज्यादा रहा।

इस कड़ी में दूसरे स्थान पर 174 विद्यालयों के साथ अल्मोड़ा जिला, तीसरे स्थान पर 150 विद्यालयों के साथ टिहरी जिला, चौथे स्थान पर 114 विद्यालयों के साथ पिथौरागढ़ जिला और पांचवें स्थान पर 99 विद्यालयों के साथ नैनीताल जिला रहा है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर के रिजल्ट में जो जिले पिछड़े हैं, वहां कम रिजल्ट देने वाले विद्यालयों में विद्यार्थियों को रेमेडियल टीचिंग के निर्देश दिए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय का कहना है कि बोर्ड के रिजल्ट में जिन स्तरों पर खामियां पाई गई हैं, उन्हें दुरुस्त करने के लिए आला अधिकारियों को तेजी से कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

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