देहरादून, जेएनएन। Raksha Bandhan 2020 and Sawan Somvar रक्षा बंधन का त्योहार दीर्घायु, आयुष्मान और सर्वार्थ सिद्धि संयोग की अमृत बेला में मनाया जाएगा। तीन अगस्त को भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व तो है ही, साथ ही सावन का आखिरी सोमवार भी है। इसीलिए यह शुभ संयोग बन रहा है। इसी दिन सोमवती पूर्णिमा और उत्तरषाड़ा नक्षत्र का योग भी बन रहा है। ज्योतिष में इस तरह के योग को पूजा अर्चना के लिए शुभ फलदायी माना गया है।

आचार्य शिव प्रसाद ग्वाड़ ने बताया कि भाई-बहन के स्नेह का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन इस बार बेहद खास होगा। क्योंकि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग बन रहा है। बताया कि ऐसा संयोग करीब 20 सालों में एक बार बनता है। इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा और ग्रहण का भी साया नहीं है। ऐसे में सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक शुभ मुहूर्त में बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

उत्तराखंड विद्वत सभा के आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने बताया कि हिंदू धर्म में हर साल सावन मास की पूर्णिमा के दिन राखी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई बहन को रक्षा का वचन देता है। बताया कि किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रकाल को अशुभ माना गया है। भद्रायोग दो अगस्त रात आठ बजकर 42 मिनट से तीन अगस्त सुबह नौ बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा।

बहनें बोली..

रायपुर निवासी कलश आदिथापा का कहना है कि भाई आर्मी में है तो हर साल घर आना संभव नहीं हो पाता। पिछले साल भाई राखी पर घर आया था। रक्षाबंधन पर भाई साथ हो तो इससे बेहतर क्या होगा। इस साल भी उसके आने की उम्मीद थी। लेकिन कोरोना के चलते नहीं आ सका। ऐसे में मैंने डाकघर के माध्यम से ही उसे राखी भेज दी है। 

चकराता रोड निवासी पूजा कहती हैं कि भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे बिना रक्षाबंधन कैसा। लेकिन देश की रक्षा से बढ़कर और कुछ नहीं। भाई को राखी और रोली कुरियर कर चुकी हूं। राखी के दिन वीडियो कॉल से भी बधाई दूंगी। 

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सरहद पर तैनात भाइयों को भेजें प्यार...

कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार दैनिक जागरण परिवार 'भारत रक्षा पर्व' का आयोजन नहीं कर रहा है। हालांकि, देश की रक्षा करने वाले भाइयों के लिए बहनें अपने संदेश हमारे माध्यम से भेज सकती हैं। ये संदेश हमें ई-मेल या वाट्सएप के माध्यम से भेजें।

वाट्सएप नंबर: 7060557170

ई-मेल: ayush.sharma@drn.jagran.com

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Posted By: Raksha Panthari

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