यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड में मौसम की मार से टमाटर और मटर की फसल को नुकसान, काश्तकारों की बढ़ी चिंता
उत्तराखंड में पर्वतीय जिलों में इन दिनों मटर-टमाटर हरी सब्जी आदि बड़ी मात्रा में पैदा हो रही है। लेकिन मौसम ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून : काश्तकारों की उम्मीदों पर मौसम पानी फेर रहा है। उत्तराखंड में फरवरी के अंतिम पखवाड़े में बारिश-बर्फबारी के साथ हुई ओलावृष्टि ने फल व सब्जी की फसल को नष्ट कर दिया है। साथ ही तेज हवा के थपेड़ों ने फूल-पत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। उत्तराखंड में पर्वतीय जिलों में इन दिनों मटर-टमाटर, हरी सब्जी आदि बड़ी मात्रा में पैदा हो रही है। लेकिन मौसम की मार से फसल को काफी नुकसान पहुंच रहा है।
बीते दिनों प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में अंधड़ के साथ ओले पडऩे से फल व सब्जी की फसल को खासा नुकसान हुआ है। प्रदेश में सामान्यत: इस समय करीब 100 से 150 क्विंटल टमाटर प्रतिदिन मंडियों में पहुंचता है। जबकि 50 से 80 क्विंटल मटर और बड़ी मात्रा में हरी सब्जियां, अदरक, लहसुन, अरबी और आलू भी बाजार में पहुंचता है। लेकिन खेतों में खड़ी फसलों को बाजार तक पहुंचाने से पहले ही किसान मौसम की मार झेल रहा है। जौनसार-बावर के किसान राजेंद्र चौहान का कहना है कि टमाटर और मटर के दानों को ओलावृष्टि ने नुकसान पहुंचाया है। उनकी करीब 15 बीघा के खेतों में इस समय कई तहर की सब्जियां उगी हैं। अचानक हो रही ओलावृष्टि के कारण सब्जियां खेतों में ही खराब हो रही है। पेड़ों पर लगे सेब, अनार और पुलम पर भी प्रतिकूल असर हुआ है। फसलों को हुए नुकसान ने किसानों और बागवानों को चिंता में डाल दिया है।
मंडी में घटी टमाटर की आवक
देहरादून स्थित मंडी में निकटवर्ती पहाड़ी इलाकों से टमाटर और मटर पहुंचता है। लेकिन पिछले एक हफ्ते से स्थानीय सब्जियों की आवक में गिरावट आई है। मंडी सचिव विजय थपलियाल का कहना है कि पहले मंडी में 30 से 40 क्विंटल टमाटर पहुंच रहा था। वहीं, इन दिनों 20 से 25 क्विंटल पर सिमट गया है। शहर की डिमांड पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों से करीब 300 क्विंटल टमाटर प्रतिदिन लाया जा रहा है।
