राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को ठीक एक महीना गुजर गया, मगर यह लाख टके का सवाल अब भी सियासी गलियारों में चर्चा में है कि नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत किस विधानसभा सीट से विधायक बनेंगे। हालांकि, कई विधायकों ने उनके लिए सीट छोड़ने की पेशकश की है, मगर मुख्यमंत्री का कहना है कि इसका फैसला भाजपा आलाकमान ही करेगा।

पहला मौका नही, जब सांसद बने मुख्यमंत्री

तीरथ सिंह रावत वर्तमान में पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद हैं। उन्होंने गत 10 मार्च को मुख्यमंत्री का पद संभाला। इस लिहाज से उन्हें छह महीने के भीतर, यानी 10 सितंबर तक विधानसभा का सदस्य बनना है। वैसे उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद यह पहला मौका नहीं है, जब किसी सांसद को मुख्यमंत्री बनाया गया और फिर उसे विधानसभा चुनाव लड़ना पड़ा। वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को बेदखल कर सत्ता पाई। तब कांग्रेस नेतृत्व ने किसी निर्वाचित विधायक के बजाय बुजुर्ग नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया। तिवारी के लिए रामनगर के कांग्रेस विधायक योगंबर सिंह रावत ने सीट खाली की और तिवारी भारी बहुमत से उप चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर खाली कराई सीट

वर्ष 2007 के दूसरे विधानसभा चुनाव में भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिला। इस बार भाजपा आलाकमान ने निर्वाचित विधायक के स्थान पर पौड़ी गढ़वाल सीट से सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी। तब भाजपा ने कांग्रेस को झटका देते हुए मुख्यमंत्री खंडूड़ी के लिए धुमाकोट सीट खाली कराई। उस वक्त टीपीएस रावत धुमाकोट से कांग्रेस के विधायक थे। उन्होंने खंडूड़ी के लिए अपनी सीट छोड़ी तो भाजपा ने उन्हें पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाकर संसद पहुंचाया।

पांच साल बाद कांग्रेस ने भाजपा से किया हिसाब बराबर

पहले और दूसरे विधानसभा चुनावों की कहानी वर्ष 2012 में हुए तीसरे विधानसभा चुनाव में भी दोहराई गई। कांग्रेस के सत्ता में आने पर टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बनाए गए। इस बार कांग्रेस ने भाजपा से हिसाब बराबर करते हुए सितारगंज से भाजपा विधायक किरण मंडल से मुख्यमंत्री बहुगुणा के लिए सीट खाली कराई। बहुगुणा आसानी से उप चुनाव जीत गए। दो साल बाद फरवरी 2014 में बहुगुणा के स्थान पर कांग्रेस ने हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया तो उनके लिए धारचूला के कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने सीट खाली की।

तीरथ के लिए सीट छोड़ने को कई विधायक तैयार

अब तीरथ सिंह रावत ऐसे पांचवें मुख्यमंत्री बने हैं, जो पद संभालते वक्त विधायक नहीं थे। अब तीरथ के लिए सीट छोड़ने के लिए भाजपा के कई विधायक आगे आए हैं। बदरीनाथ के भाजपा विधायक महेंद्र भट्ट ने सबसे पहले यह पेशकश की। फिर कोटद्वार से विधायक व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह ने भाजपा नेतृत्व के समक्ष मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ने की बात कही। साथ ही उन्होंने तीरथ सिंह रावत की पौड़ी लोकसभा सीट से उप चुनाव लड़ने की मंशा भी जताई। भीमताल से निर्दलीय विधायक राम सिंह कैड़ा ने भी मुख्यमंत्री को अपनी सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है।

पार्टी नेतृत्व करेगा फैसला, कहां से लड़ना है चुनाव

इस संबंध में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का कहना है कि उन्हें गढ़वाल और कुमाऊं, दोनों मंडलों से कई पार्टी विधायकों ने अपनी सीट से चुनाव लड़ने को कहा है, लेकिन इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगे, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।

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