जागरण संवाददाता, देहरादून। देहरादून में बडासी पुल की एप्रोच रोड के ध्वस्त होने के मामले में वर्तमान अधिशासी अभियंता (ईई) जेएस रावत के निलंबन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि उनकी तैनाती पुल निर्माण के बाद राजमार्ग खंड देहरादून में हुई थी। वर्ष 2018 में इन्वेस्टर समिट से पहले ही पुल का निर्माण पूरा कर दिया गया था। निलंबित किए गए अधिशासी अभियंता जेएस रावत इसके बाद खंड में तैनात किए गए और निर्माण के भी करीब तीन साल के अंतराल में पुल की एप्रोच रोड ध्वस्त हुई। शासन ने तर्क दिया है कि ठेकेदार को अंतिम भुगतान बिना तकनीकी जांच पड़ताल के वर्तमान अधिशासी अभियंता ने किया है।

लिहाजा, यह उनकी लापरवाही है। हालांकि, आदर्श स्थिति यह होती है कि निर्माण पूरा होने के बाद ही ठेकेदार का भुगतान कर दिया जाए। इसके अलावा निर्माण की दायित्व (लाइब्लिटी) अवधि पूरी होने तक भी भुगतान लंबित करने का विभाग में चलन है।

इस मामले में भी वर्ष 2020 में दायित्व अवधि पूरी होने के बाद ठेकेदार को अवशेष भुगतान किया गया था। क्योंकि किसी पुल में निर्माण की तकनीकी खामी कब उजागर होगी, यह कोई नहीं बता सकता। लिहाजा, भुगतान को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। जिस खामी के चलते बडासी पुल की एप्रोच रोड ध्वस्त हुई, वह भुगतान किए जाने तक सामने नहीं आई थी।

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कार्यालयों का कामकाज किया जाए सामान्य

सब रजिस्ट्रार कार्यालय (भूमि) में कामकाज सामान्य करने की मांग उठाई गई है। इसको लेकर देहरादून बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष आलोक घिल्डियाल ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को पत्र भेजा है। मंगलवार को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा कि सब रजिस्ट्रार कार्यालयों को कुछ प्रतिबंध के साथ खोलने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक कार्यालय में पूर्व अप्वाइंटमेंट के आधार पर 25 रजिस्टियां की जा रही हैं। प्रतिदिन रजिस्ट्री की सीमा समाप्त की जानी चाहिए।

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Edited By: Sunil Negi