विकासनगर, जेएनएन। शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर अनशन को समाप्त करने में भले ही प्रशासन और पुलिस ने फिलहाल सफलता हासिल कर ली हो, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि प्लांट से उठने वाली दुर्गंध से परेशान लोग फिर से आंदोलन को मजबूर होंगे।  

कूड़ा निस्तारण केंद्र को स्थानांतरित किए जाने की मांग करते हुए छह दिनों तक चले आंदोलन को प्रशासन ने पुलिस की मदद से रविवार को समाप्त कराने से स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन यह आंदोलन कितने दिन के लिए समाप्त हुआ यह एक बड़ा सवाल बनकर प्रशासन के सामने खड़ा है। बताते चलें प्लांट में होने वाली कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान प्लांट से उठने वाली दुर्गंध की तीव्रता इतनी ज्यादा होती है, यह स्थानीय लोगों से बर्दाश्त नहीं हो पाती। लोगों को भोजन करना, सोना और सांस लेने तक में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

शीशमबाड़ा गांव से लेकर आसपास के सेलाकुई, जमनपुर समेत पूरे सेंट्रल होपटाऊन के लोग दुर्गंध की इस समस्या से बेहाल हो जाते हैं। क्षेत्र की समस्त जनता की परेशानी के चलते यहां कूड़ा निस्तारण केंद्र को लेकर भाजपा-कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन एक साथ मिलकर प्लांट के विरोध में खड़े हैं। सेंट्रल होपटाऊन के पूर्व ग्राम प्रधान भगत सिंह राठौर, विजयपाल बर्तवाल, कांग्रेस नेता आकिल अहमद, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुमित चौधरी, सामाजिक संगठनों से जुड़े सुंदर थापा, सपना शर्मा, उमा पंवार, सीएम जोशी, व्यापार मंडल के नेता सुधीर गुप्ता, चैतन्य अनिल गौड समेत लगभग सब जनप्रतिनिधि और समाजसेवी जनता की इस समस्या पर प्लांट को बंद कराने के अलावा किसी अन्य समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन की आंदोलन को समाप्त करने की यह सफलता ज्यादा समय तक कायम रह पाएगी, इसका अंदाजा कम ही है। 

दुर्गंध कम हो तो बन सकती है समझौते की गुंजाइश 

हालांकि स्थानीय जनता के बार-बार प्लांट को स्थानांतरित करने की मांग करने पर देहरादून नगर निगम के मेयर सुनील उनियाल गामा समेत निगम के सभी अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी प्लांट प्रबंधन को इस प्रकार के कीटनाशकों का छिड़काव करने को कह चुके हैं, जिससे दुर्गंध और कूड़े के कारण पैदा हो रहे मक्खी-मच्छर जैसी समस्याओं से छुटकारा लोगों को मिल सके। लेकिन बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। यदि निगम के अधिकारी इस प्रकार की कोई व्यवस्था करा देते हैं तो प्लांट के विरोध को कुछ कम किया जा सकता है। 

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विधायक भी हैं जनता के साथ 

हालांकि प्लांट को लेकर होने वाला विरोध सरकार के खिलाफ है, लेकिन इस मुद्दे पर सहसपुर के भाजपा विधायक जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने बार-बार अपनी इस बात को दोहराया है कि प्लांट प्रबंधन या नगर निगम क्षेत्र के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकता तो वे जनता के साथ मिलकर प्लांट के विरोध में आंदोलन में शामिल हो जाएंगे

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Posted By: Raksha Panthari

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