देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश सरकार के पदोन्नति में रोक लगाने के बाद से ही तमाम विभागों में भर्ती प्रक्रिया ठप सी पड़ गई है। कारण यह कि अधिकांश विभागों में पदोन्नति के बाद ही निचले पद खाली होने थे, जिन पर भर्ती की जानी थी। अब सबकी नजरें पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर लगी हुई हैं। इसके बाद ही पदोन्नति पर लगी रोक हटने की संभावना जताई जा रही है। 

प्रदेश सरकार ने बीते सितंबर माह में प्रदेश में सभी विभागों में डीपीसी बैठकों को स्थगित करते हुए पदोन्नति प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी थी। इसका कारण हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण के मसले को लेकर चल रहे मुकदमें थे। हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले सरकार से चार माह के भीतर जनरल, ओबीसी और एससी और एसटी वर्ग के कर्मचारियों की सूची बनाकर आवश्यकता के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण का फैसला लेने को कहा है। वहीं, सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर एसएलपी दायर कर रही है। इस पर अगली सुनवाई 25 नवंबर को होनी है। 
कोर्ट में चल रहे इन मुकदमों का सबसे अधिक असर नौकरी की राह ताक रहे युवाओं और सेवानिवृति की दहलीज पर खड़े कार्मिकों पर पड़ रहा है। पुलिस महकमे की ही बात करें तो यहां 1700 रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती की जानी है। यह भर्ती प्रक्रिया इसलिए रूकी हुई है क्योंकि इनमें बड़ी संख्या में पद विभागीय पदोन्नति के बाद रिक्त होने हैं।
पदोन्नति प्रक्रिया में रोक लगने के कारण रोजगार की बाट जोह रहे युवाओं का इंतजार लंबा बढ़ता जा रहा है।
इसी प्रकार पुलिस महकमे में कई उप निरीक्षक व निरीक्षक रिटायर होने की कगार पर खड़े हैं। यह भी उम्मीद कर रहे थे कि रिटायरमेंट से पहले इन्हें पदोन्नति मिल जाएगी ताकि उनकी पेंशन में कुछ सुधार हो सके। उनकी इस आशा पर भी सरकार का आदेश भारी पड़ रहा है। अन्य विभागों में भी अमूमन यही स्थिति है।

 

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