जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में अंतरराष्ट्रीय पारस्परिक संवाद बैठक में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने धार्मिक एकता का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक भारत को शांति, प्रेम और समरसता के रंगों से सजाने का आह्वान भी किया।

शनिवार को परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में पारस्परिक संवाद बैठक का शुभारंभ आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न धर्म गुरुओं ने प्रतिभाग किया। कायसीड और ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जिस प्रकार एक धागा फूलों की अनेकता को एकता में बदल देता है उसी प्रकार इस तरह के आयोजन विविधता में एकता की इबारत लिखते हैं। भारत में भले ही सर्वत्र विविधता में एकता के दर्शन होते हैं, परंतु भारतीयों ने हमेशा एकता, भाईचारा, दयालुता और प्रेमपूर्ण एक साथ रहने का संदेश दिया। उन्होंने समरसता का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस समरस भारत का सपना देखा था वह आज युवाओं को पूरा करना होगा। जीवा की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा हमें वसुधैव कुटुम्बकम और हम सभी आपस में भाई-भाई हैं, सभी एक परिवार हैं चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम का संदेश देती है। इस मौके पर पतंजली योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, स्वामी कैलाशानंद, अखिल भारतीय इमाम संगठन के अध्यक्ष डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी, अजमेर दरगाह शरीफ की गद्दी नशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती, मौलाना अब्दुला, साध्वी भगवती सरस्वती कायसीड के कार्यक्रम निदेशक मोहम्मद शिफान राफादीन और कायसीड समन्वयक अधिकारी रेनाटा कैटालिन नेल्सन आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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