देहरादून, राज्य ब्यूरो। परिवहन निगम की बसों में प्रेशर हार्न का प्रयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाएगा। परिवहन मुख्यालय ने हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए परिवहन निगम को उचित कदम उठाने को कहा है। यह भी कहा गया कि निगम की बसों की टूटी-फूटी बैक लाइट और रिफ्लेक्टर को दुरुस्त करने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। परिवहन निगम की बसों में अभी भी प्रेशर हॉर्न का उपयोग किया जा रहा है। 

प्रेशर हॉर्न के कारण न केवल ध्वनि प्रदूषण होता है बल्कि इसकी तेज आवास से आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे सड़क का यातायात भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। पूर्व में परिवहन मुख्यालय ने जून 2017 को भी एक पत्र लिखकर परिवहन निगम से बसों में प्रेशर हॉर्न पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने की अपेक्षा की थी। बावजूद इसके निगम ने इसका कोई संज्ञान नहीं लिया और बसों में प्रेशर हॉर्न का उपयोग जारी रखा। 
बीते वर्ष यानी जुलाई 2018 को हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए परिवहन विभाग को वाहनों में हूटर और मल्टी टोन हॉर्न आदि समेत अन्य प्रेशर हॉर्न पर प्रतिबंधित लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस क्रम में अब आयुक्त परिवहन शैलेश बगोली ने प्रबंध निदेशक परिवहन निगम को पत्र लिखकर परिवहन निगम की बसों से प्रेशर हॉर्न का प्रयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कराने के लिए अपने स्तर से निर्देश देने की अपेक्षा की है। 
जिससे निगम की बसों द्वारा ध्वनि प्रदूषण न किया जा सके और आमजन को भी ध्वनि प्रदूषण जनित परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा उन्होंने प्रबंध निदेशक का ध्यान निगम की बसों की भौतिक हालात की ओर भी आकृष्ट कराया है। पत्र में कहा गया है कि निगम की बसों के रिफ्लेक्टर, बैक लाइट, वाइपर आदि क्रियाशील अवस्था में हों। साथ ही वाहनों के एक तरफ पंजीयन चिह्न भी अंकित किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

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