देहरादून, जेएनएन। फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा के बाद रविवार शाम को सोशल मीडिया में वायरल हुई परीक्षा की एक ओएमआर सीट व प्रश्न पत्र की प्रति के मामले में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने जांच पुलिस की साइबर सेल से करवाने का निर्णय लिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती परीक्षा के दौरान हुई इस चूक के बाद आयोग की किरकिरी हुई है। चौतरफा बढ़ते दबाव के चलते सोमवार दोपहर बाद उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू की अध्यक्षता में बैठक की। जिसमें निर्णय लिया कि सोशल मीडिया से परीक्षा से संबंधित जो दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, उनकी प्रतियां मंगलवार सुबह पुलिस साइबर सेल को सौंपी जाएगी, ताकि पुलिस जांच कर करवाई करे।

ओएमआर शीट वायरल करने वाला अभ्यर्थी पहुंचा आयोग: आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने बयान जारी कर बताया कि सोशल मीडिया में जो ओएमआर इमेज वायरल हुई है, उसको लेकर वायरल करने वाला युवक जयपाल शर्मा निवासी हरबर्टपुर दोपहर के समय स्वयं आयोग कार्यालय में उपस्थित हुआ। उसने बताया कि रविवार को फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा के लिए उसका केंद्र पथरीबाग स्थित लक्ष्मण इंटर कॉलेज में था। उसने बताया कि दूसरी पाली की चार बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्हें जैसे ही मोबाइल मिले, उसने स्वयं अपने मोबाइल से ओएमआर शीट की फोटो ले ली। इस दौरान ओएमआर शीट एकत्र की जा रही थीं। जिसे उसने रात आठ बजे स्वयं ही वाट्सएप पर अपलोड किया।

यूकेडी, बेरोजगार संघ ने खोला मोर्चा

फॉरेस्ट गार्ड के 1218 पदों के लिए लिखित परीक्षा रविवार को प्रदेश के 188 परीक्षा केंद्रों में दो पाली में हुई। जिसमें करीब एक लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। सोशल मीडिया में वायरल परीक्षा संबंधित दस्तावेजों को लेकर यूकेडी ने आयोग कार्यालय में विरोध दर्ज किया। यूकेडी के केंद्रीय प्रवक्ता सुनील ध्यानी ने आरोप लगाया कि यह परीक्षा देने वाले युवाओं के साथ छलावा है। उधर, उत्तराखंड बेरोजगार महासंघ के अध्यक्ष कमलेश भट्ट के नेतृत्व में बेरोजगारों ने आयोग सचिव को ज्ञापन सौंप मामले की न्यायिक जांच की मांग की।

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प्रश्न पत्र वायरल करने वाले की नहीं हो पाई पहचान

आयोग का कहना है कि सोशल मीडिया में फॉरेस्ट गार्ड की लिखित परीक्षा की प्रश्न पुस्तिका के एक पेज की इमेज दिखाई दे रही है, जिसमें 41 से 49 तक के कुल नौ प्रश्न व ओएमआर सीट का एक छोटा सा अंश दिखाई दे रहा है। जब वायरल करने वाले मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो वह स्विच ऑफ मिला। ट्रू कॉलर में जब नंबर की सत्यता की जांच की गई तो वह फर्जी शो कर रहा है। ऐसे में अभी तक प्रश्न पुस्तिका वायरल करने वाले की पहचान नहीं हो पाई है। आयोग ने दावा किया कि प्रथम दृष्टया दोनों मामले गंभीर प्रकृति के नहीं लगते, फिर भी मामले की जांच पुलिस की साइबर सेल से करवाई जा रही है।

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Posted By: Sunil Negi

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