केदार दत्त, देहरादून। Poisonous species of snakes बेहतरीन आबोहवा की पहचान रखने वाली दूनघाटी की सरजमीं 'बिग फोर' नाम की चौकड़ी को भी खूब रास आ रही है। चौकड़ी इतनी खतरनाक कि यदि किसी ने छेड़ लिया और ये उस पर दांत गड़ाने में कामयाब हो गए तो उसका भगवान ही मालिक है। तस्वीर का दूसरा पहलू देखिये कि ये मानव के लिए लाभकारी भी हैं। खेतों में फसलों की रक्षा करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। डर और सुरक्षा को लेकर पहेली बहुत हो गई, अब इसे बुझाये देते हैं। यहां बात हो रही है सांपों की उन खतरनाक प्रजातियों की, जो दूनघाटी में भी मौजूद हैं।

सांपों के लिहाज से देखें तो देश में इनकी लगभग 265 प्रजातियां मिलती हैं, जिनमें से करीब 65 जहरीली हैं। इनमें भी केवल 20 ऐसी हैं, जिनका जहर मनुष्य की जीवनलीला समाप्त कर सकता है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में नजर दौड़ाएं तो यहां सांपों की लगभग 85 प्रजातियां रिपोर्टेड हैं।

(कोबरा, फाइल फोटो)

देशभर में बिग फोर के नाम से जानी जाने वाली सबसे खतरनाक प्रजातियां 'कोबरा', 'करैत', 'सोस्किल्ड वाइपर', 'रस्सल वाइपर' को दूनघाटी खूब भा रही है। सापों की ये वही प्रजातियां हैं, जिनके काटने से देश में सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है।

(सोस्किल्ड वाइपर, फाइल फोटो)

इनमें भी 'किंग कोबरा' व 'रस्सल वाइपर' तो विश्व के खतरनाक सांपों की टापटेन सूची में शामिल हैं। इस मर्तबा भी दूनघाटी में काफी संख्या में यह बिग फोर खूब नजर आए। जानकारों का कहना है कि इस बार बारिश अच्छी हुई है। बिलों में पानी घुसने के कारण बाहर निकलने पर ये दिखाई भी दिए।

(करैत, फाइल फोटो)

राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग बताते हैं कि दूनघाटी में चारों तरफ जंगल और खेती ठीक होने के कारण सांपों के लिए यहां बेहतर वासस्थल है। फिर राजाजी नेशनल पार्क से भी यह क्षेत्र सटा हुआ है। सुहाग के अनुसार खौफ की यह चौकड़ी खतरनाक अवश्य है, लेकिन प्रकृति प्रहरी होने के साथ ही ये सांप मानव के मित्र भी हैं। पर्यावरण संरक्षण से लेकर फसलों को चूहों आदि से बचाने में इन सापों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

(रस्सल वाइपर, फाइल फोटो)

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Edited By: Raksha Panthri