v>देहरादून, [जेएनएन]: सर्वर अपग्रेड होने के करीब 13 दिन बाद भी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सेवाएं पटरी पर नहीं लौट पाई हैं। स्थिति यह है कि एटीएम कार्ड न तो स्वैपिंग मशीन में काम कर रहे हैं, न ही उनसे कैश मिल रहा है। पीएनबी के चेक क्लियर होने में भी तकनीकी अड़चन सामने आ रही हैं। कई मामले अब तक ऐसे भी सामने आ चुके हैं कि एटीएम में कार्ड डालने पर कैश तो नहीं निकल रहा, जबकि बैलेंस कट जा रहा है। पासबुक एंट्री में भी चार से पांच दिन का समय लग रहा है।

पीएनबी ने देश भर में बीते माह 26 से 28 जनवरी को तीन दिवसीय छुट्टी के दौरान सर्वर अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, 26 से पहले ही उन्होंने यह कसरत शुरू कर दी थी, ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े। लेकिन, सर्वर अपग्रेड होना एक तरह से बैंक उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन गया है। अभी तक बैंक का सर्वर डाउन चल रहा है, जिस वजह से चेक क्लियर नहीं हो पा रहे हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो एक दिन में ही लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन चेक के जरिये होता है, जिसे पूरा करने में अड़चनें आ रही हैं। पीएनबी के एटीएम कार्ड से स्वैपिंग करके भुगतान नहीं हो पा रहा है और कई एटीएम से नकद निकासी भी नहीं हो पा रही है। कई शाखाओं में नकद लेनदेन में भी परेशानी हो रही है, जबकि सर्वर डाउन होने से पासबुक में एंट्री के लिए भी कई दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।
नहीं मिल रही चेकबुक और एटीएम कार्ड
इन दिनों पीएनबी में हालात बेहद खराब हैं। उपभोक्ताओं को न तो नया एटीएम जारी हो रहा है और न ही नई चेक बुक मिल रही है। नए खाते खोलने का काम भी बिलकुल बंद पड़ा हुआ है। जिन खाताधारकों के लोन की किश्त सीधा खाते से कटती है उनकी फरवरी माह की किश्त भी अब तक नहीं कट पाई है। हालांकि बैंक अधिकारी और कर्मचारी देर रात तक काम निपटा रहे हैं। लेकिन, तकनीकी दिक्कतों से बैंकों में काम का बैकलॉग बढ़ता जा रहा है।
मंडल प्रमुख (पीएनबी) एके खोसला  का कहना है कि सर्वर अपग्रेड होने के बाद से कामकाज में तकनीकी अड़चनें पूरे देशभर में बनी हुई हैं। हम अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा देना चाहते हैं, जिस वजह से सर्वर अपग्रेड किया गया है। ग्राहकों को शुरुआत में थोड़ा परेशानी जरूर होगी, लेकिन बाद में उन्हें ही लाभ मिलेगा। तकनीकी खामियां दूर करने का काम छुट्टी के दिन भी जारी है। उम्मीद है कि सोमवार तक परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी। 

By Sunil Negi