देहरादून, जेएनएन। दून में नौसेना की पनडुब्बियों के पेरिस्कोप (परिदर्शी) का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए यंत्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान में ऑप्ट्रोनिक मास्ट इंटीग्रेशन बे की स्थापना की गई है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की महानिदेशक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन सिस्टम्स) जे मंजुला ने इस भवन का उद्घाटन किया।

महानिदेशक जे मंजुला ने दून में ऑप्ट्रोनिक मास्ट भवन के उद्घाटन के साथ ही इंटरनेशन कॉन्फ्रेंस ऑन ऑप्टिक्स एंड इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स (आइकॉल)-2019 में भी भाग लिया। साथ ही संस्थान के रक्षा विज्ञानियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं का अपडेट भी लिया। इसके बाद महानिदेशक मंजुला ने डीआरडीओ की दूसरी प्रयोगशाला डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लिकेशन लैबोरेटरी का दौरा भी किया।

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वहीं, आइआरडीई के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. पुनीत वशिष्ठ ने पेरिस्कोप के निर्माण पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक अरिहंत जैसी परमाणु पनडुब्बी के लिए भी फ्रांस से पेरिस्कोप मंगाए जा रहे हैं। हालांकि, अब भारत में ही इसका निर्माण संभव हो सकेगी। उन्होंने बताया कि समुद्र के भीतर संचालित होने वाली पनडुब्बियों की निगरानी बेहतर हो पाएगी।

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क्योंकि पनडुब्बी के बाहर सिर्फ पेरिस्कोप का कुछ भाग निकला होगा। जो समुद्र के ऊपर एक सेकंड में करीब 50 बार 360 डिग्री में घूमता रहेगा और हर तरह की तस्वीर को कैद कर लेगा। इतनी रफ्तार से घूमने के बाद भी सभी तस्वीरें साफ नजर आएंगी। उधर, आइकॉल-2019 के दूसरे दिन देश-विदेश के रक्षा विशेषज्ञों ने तमाम शोध पत्र प्रस्तुत किए और भविष्य की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर निदेशक लॉयनल बेंजामिन आदि उपस्थित रहे। 

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