देहरादून, जेएनएन। Kamika Ekadashi 2020 कामिका एकादशी पर लोगों ने मंदिरों और घरों पर पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की। सावन महीने में कामिका एकादशी का सभी एकादशी से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा विधि के शुभ प्रभाव से पाप नष्ट होते हैं।  

शुभ मुहूर्त पर गुरुवार को लोगों ने सुबह उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लिया। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर आरती की। इसके साथ ही शहर के मंदिरों के बाहर, रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी के बाहर जरूरतमंदों को दान कर पुण्य कमाया। व्रतियों ने शाम को मीठा भोजन के साथ व्रत खोला। 

वहीं, शहर के पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में सादगी के साथ पूजा अर्चना की गई। मंदिर के सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि हर बार इस दिन विशेष कीर्तन किया जाता था, लेकिन इस बार कोरेानाकाल को देखते हुए इसे सूक्ष्म रूप दिया गया। सनातन धर्म मंदिर प्रेमनगर में महिलाओं ने भजन कीर्तन कर भगवान का भोग लगाया। पंडित कृष्ण प्रसाद, माधव उपाध्याय, राजू उपाध्याय ने कहा कि आज के दिन दान, पुण्य करने के मनुष्य के कष्ट दूर होते हैं। इस मौके पर मंदिर प्रधान सुभाष माकिन, अवतार किशन कौल, रवि भाटिया, गुलशन माकिन, फकीर चंद, मनोज बहल, यशपाल बहल, संगीता भाटिया, अनीता मल्होत्रा, कांता चावला, अंजली शर्मा आदि रहे।

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जानिए कामिका एकादशी का महत्व 

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को कामिका एकादशी के बारे में बताया था। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि कामिका एकादशी का व्रत रखने से हर व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ कराने के बराबर पुण्य मिलता है। इसके साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। एकादशी का व्रत रखने से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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