देहरादून, [केदार दत्त]: प्रदेश में पानी की बर्बादी रोकने की दिशा में राज्य सरकार गंभीर रुख अख्तियार करने जा रही है। बिल्डर्स और कॉलोनाइजर्स जल संस्थान से पेयजल कनेक्शन लेने की बजाए नलकूप व हैंडपंप के जरिए भूजल के अनियोजित दोहन को तवज्जो दे रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार नई व्यवस्था करने जा रही है। अब उन सभी लोगों को जलकर देना होगा, जो भूजल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मसले पर कैबिनेट की उपसमिति गंभीरता से मंथन कर रही है और जल्द ही उसकी बैठक भी प्रस्तावित है। 

नियमानुसार भूजल के उपयोग के लिए सिंचाई विभाग के अधीन गठित ग्राउंड वाटर रेगुलेटरी अथॉरिटी से अनुमति लेने के बाद भूजल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए निर्धारित शुल्क के साथ ही कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं। बावजूद इसके राज्य में तमाम बिल्डर्स और कॉलोनाइजर्स अथॉरिटी से इजाजत लेने की बजाए नई बनने वाली कॉलोनियों में धड़ल्ले से नलकूप और हैंडपंप लगा रहे हैं। जाहिर है कि जमीन से मुफ्त में मिल रहे इस पानी का बेतहाशा और अनियोजित दोहन हो रहा है। 

वहीं, पेयजल महकमा इन कॉलोनियों अथवा घरों के आसपास पाइपलाइन बिछाने में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों के पेयजल कनेक्शन न लेने से निराश है। इससे उसे जलकर के रूप में मिलने वाले राजस्व से हाथ धोना पड़ रहा है। इस सबको देखते हुए सरकार ने अब भूजल के मुफ्त में हो रहे दोहन पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे लोगों पर जलकर लगाने की ठानी है। यह मसला कैबिनेट की उपसमिति को सौंपा गया है। बताया गया कि जल्द ही जलकर के लिए नीति तय कर इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। इससे राजस्व में भी वृद्धि होगी। 

पानी होगा महंगा 

प्रदेश में जल्द ही पानी भी महंगा होगा। जल संस्थान की ओर से प्रति कनेक्शन वसूले जाने वाले जलमूल्य में 15 फीसद की बढ़ोतरी पर मंथन चल रहा है। यह वृद्धि पिछले दो साल से नहीं हुई है। हालांकि, यह मसला भी कैबिनेट की उपसमिति के पास विचाराधीन है। 

पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि भूजल के इस्तेमाल पर टैक्स और जलमूल्य में वृद्धि से जुड़े दोनों मसले कैबिनेट की उपसमिति को सौंपे गए हैं। उपसमिति का नोटिफिकेशन हो चुका है और जल्द ही उसकी बैठक होगी। सभी पहलुओं पर मंथन के बाद इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।

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Posted By: raksha.panthari