देहरादून, जेएनएन। कहते हैं जब कोई बीमार हो या किसी पीड़ा से ग्रस्त हो तो पहले भगवान का नाम मुंह से निकलता है, फिर डॉक्टर में भगवान दिखता है। अगर आपकी मुश्किल के समय एक अच्छा डॉक्टर मिल जाए और प्यार और मानवता की भावना से आपकी देखभाल करे तो उससे ज्यादा कुछ भी अच्छा नहीं है। कुछ डॉक्टर इसे चरितार्थ करते दिखाई दे रहे हैं। वह पहाड़ के दुर्गम इलाकों में जाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मुहिम चला रहे हैं। इसके लिए वह नियमित रूप से पहाड़ी जिलों में कैंप लगा रहे हैं। 

उत्तराखंड के दुरूह पर्वतीय क्षेत्रों में अभी भी स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे का अभाव है। स्वास्थ्य सेवाएं लचर होने से छोटी-छोटी बीमारी में भी लोगों को सैकड़ों किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में न केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है, बल्कि जीवन रक्षक प्रणाली भी उतनी मजबूत नहीं है। राज्य सरकार प्रयास जरूर कर रही है, पर अब भी स्थितियां बहुत ज्यादा नहीं बदली है। राज्य के सुविधाजनक मैदानी क्षेत्रों में निजी अस्पतालों की बहुलता के बीच सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भी कुछ हद तक ठीक हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में व्यस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। ऐसे में कुछ चिकित्सक सेवा के संकल्प के साथ इस खाई को पाटने का प्रयास कर रहे हैं। 

चलो गांव की ओर के जरिए मिल रहा इलाज

दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय से सेवानिवृत्त हुए वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसडी जोशी डॉक्टर जोशी चमोली जिले के रहने वाले हैं। जनपद के अंतर्गत आता है। वह प्रत्येक दो माह में एक स्वास्थ्य कैंप अपने गांव में लगाते हैं। जिससे आसपास के गांव के लोगों को भी तमाम बीमारियों का इलाज मिल सके। चमोली के साथ-साथ जनपद उत्तरकाशी व पौड़ी में वह नई सोच संस्था के साथ मिलकर निश्शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगा रहे हैं। उनका प्रयास है कि प्रत्येक जनपद में वह शिविर आयोजित करें। 

पहाड़ के लोगों को विशेषज्ञ परामर्श 

प्रदेश में भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बड़ी संख्या में अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की गई है। लेकिन समस्या यह है कि प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की अब भी भारी कमी है। स्थिति यह कि हृदय रोग, न्यूरो, मनोरोग आदि के गिने-चुने ही चिकित्सक हैं। ऐसे में दून स्थित चारधाम अस्पताल के संचालक एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. केपी जोशी की ओर से एक पहल की गई है। पिछले दस साल से वह नियमित रूप से जनपद उत्तरकाशी में निश्शुल्क स्वास्थ्य शिविर संचालित कर रहे हैं। जिसके जरिए वह विशेषज्ञ चिकित्सकों को दुरुह क्षेत्र तक लेकर पहुंचते हैं। पहाड़ के लोगों को न केवल विशेषज्ञ परामर्श बल्कि जांच, दवा, आदि की निश्शुल्क मिलती है।

अपनी माटी से जुड़ा एक परिवार 

दून नर्सिंग होम के संचालक एवं प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जयंत नवानी के स्तर से भी लगातार दुरुस्त क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वह कभी मेडिकल कैंप लगाते हैं तो कभी युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरणा देते हैं। उनकी पत्नी और शहर की प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल नवानी ने उनका हर कदम पर साथ दिया है। वहीं बेटा आई सर्जन डॉ. निशांत नवानी और उनकी पत्नी डॉ. जया नवानी विरासत में मिली सेवा की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।

पीएमएचएस ने भी की है पहल 

प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने भी दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में नियमित रूप से शिविर लगाने की पहल की है। इसकी शुरुआत उत्तरकाशी के पुरोला में शिविर आयोजित कर की जा चुकी है। पर इसके बाद कोरोना महामारी के कारण शिविर नियमित रूप से आयोजित नहीं किए जा सके। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. नरेश नपलच्याल का कहना है कि कोरोना के कारण इस मुहिम पर ब्रेक लग गया था। पर आगे यह कैंप नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

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