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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 10, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अगर आपने पालतू कुत्‍ते का पंजीकरण नहीं कराया तो होगा जुर्माना, जानिए कहां और कैसे कराएं पंजीकरण

By Sunil NegiEdited By:
Published: Thu, 10 Dec 2020 10:05 AM (IST)Updated: Thu, 10 Dec 2020 01:30 PM (IST)

अगर आपने अपने पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है तो जल्द करा लें। जनवरी से नगर ...और पढ़ें

अगर आपने अपने पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है तो जल्द करा लें।
अगर आपने अपने पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है तो जल्द करा लें।

अंकुर अग्रवाल, देहरादून। अगर आपने अपने पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है तो जल्द करा लें। जनवरी से नगर निगम ऐसे मकान मालिकों के विरुद्ध कार्रवाई करने जा रहा है जिन्होंने पालतू कुत्ते का निगम में पंजीकरण नहीं कराया है। इसमें 500 रुपये जुर्माने से लेकर मुकदमे तक की कार्रवाई का प्रविधान है। नगर निगम ने 2014 में पालतू कुत्तों का पंजीकरण शुरू किया था, जिसमें अभी तक महज 65 कुत्तों का ही पंजीकरण हुआ था। बीते एक महीने में निगम के पशु चिकित्सा अनुभाग ने शहर में सर्वे किया और मौजूदा समय में आंकड़ा 980 पहुंच गया है। शहर में एक अनुमान के अनुसार पालतू कुत्तों की संख्या 50 हजार के आसपास है।

सुबह या शाम सैर के लिए आप कहीं भी निकल जाइए, पूरे शहर में आपको गले में चेन व पट्टा बांधे घूम रहे पालतू कुत्तों पर आपकी नजर पड़ जाएगी। ये गंदगी फैलाते हुए भी दिखेंगे, गुर्राते हुए भी व सड़क पर नित्यक्रिया करते हुए भी, लेकिन अभी तक नगर निगम इनके पंजीकरण को लेकर गंभीर नहीं था। भले इनकी संख्या हजारों में है पर निगम प्रशासन के अनुसार दो माह पूर्व तक शहर में महज 65 ही पालतू कुत्ते थे। इनके मालिक से 200 रुपये सालाना शुल्क लिया जाता है। अब निगम ने पंजीकरण न कराने वालों पर जुर्माना निर्धारित कर दिया है। इस प्रविधान के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये, दूसरी बार 5000 रुपये, जबकि तीसरी बार मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

शहर में आवारा कुत्तों का भी है आतंक 

शहर के अस्पतालों में रोजाना कुत्तों के काटने के औसतन बीस से तीस मामले सामने आ रहे हैं। अकेले दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही औसतन 18 मामले रोजाना सामने आते हैं। हर तीन माह में एंटी रेबिज वैक्सीन की तीन हजार डोज मंगाई जाती है। अस्पताल में तो इस बीमारी के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं, पर बीमारी की ‘जड़’ आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने में नगर निगम अभी तक विफल रहा है। हालांकि, आवारा कुत्तों से निजात दिलाने को चार साल पहले नगर निगम ने एबीसी ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ केंद्र केदारपुरम में शुरू किया था। नगर निगम ये दावा कर रहा कि मौजूदा समय में तकरीबन 40 हजार कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है।

डॉ. दिनेश तिवारी (वरिष्ठ नगर पशु चिकित्साधिकारी नगर निगम) ने कहा कि नगर निगम ने पालतू कुत्तों के पंजीकरण न कराने वालों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। पिछले एक माह में 915 कुत्तों का पंजीकरण किया गया है। यदि अब भी लोग सजग नहीं हुए तो कार्रवाई तय है।

पंजीकरण को प्रविधान

  • पंजीकरण फार्म के साथ पशु चिकित्सक से रैबीज से बचाने को लगने वाले टीके के लगे होने का प्रमाण-पत्र लाना होगा। 
  • जीवाणुनाशक का प्रमाण पत्र भी साथ लाना होगा। 
  • पंजीकरण के बाद नगर निगम संबंधित व्यक्ति को उसके नाम और पते वाला एक टोकन देगा।
  • पंजीकरण के लिए 200 रुपये शुल्क जमा होगा।
  • पालतू कुत्ते के किसी को काटने पर नुकसान की प्रतिपूर्ति उसके मालिक को करनी पड़ेगी।

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