देहरादून, जेएनएन। गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय से मरीजों को बेवजह रेफर किए जाने के मामले में अस्पताल प्रशासन सख्त हो गया है। तय किया गया है कि भविष्य में रेफर होने वाले हरेक मरीज का रिकॉर्ड बुक में कारण सहित पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। इसका कारणों समेत पूरा ब्योरा पहले कार्यालय में जमा होगा, उसकेबाद ही किसी को रेफर किया जाएगा। इसका समय-समय पर ऑडिट भी किया जाएगा। 

गांधी शताब्दी अस्पताल के चिकित्सकों पर ये आरोप लग रहे हैं कि वे बगैर मरीज का मर्ज समझे उन्हें अन्यत्र रेफर कर देते हैं। गर्भवती के मामले में अस्पताल के चिकित्सकों का विशेष रूप से यह रवैया रहता है। दो दिन पहले भी तीन मामले इस तरह रेफर किए गए। जबकि पूर्व में भी ऐसा हो चुका है। डॉक्टरों की मनमानियों पर नकेल कसने के लिए गत दिवस सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने व्यवस्था बनाई कि अब तीनों शिफ्टों में एक-एक महिला चिकित्सक अस्पताल में मौजूद रहेंगी।

इसी क्रम में शुक्रवार को विधायक खजानदास ने अस्पताल प्रशासन की बैठक बुलाई। विधायक तो बैठक में नहीं पहुंच पाए, पर उन्होंने अपने प्रतिनिधि हरीश नारंग को बैठक में भेजा। डॉ. रमोला ने बताया कि अब मरीजों को बेवजह अगर कोई डॉक्टर रेफर करता है तो उसके बारे में पूरी जानकारी की जाएगी। रेफर से पहले पूरा ब्योरा अस्पताल को देना होगा। साथ ही ऐसे मामलों में ऑडिट भी किया जाएगा। हर समय अस्पताल में एक डॉक्टर जरूर मौजूद रहेगा। 

दून अस्पताल में युवक की मौत पर हंगामा 

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक युवक की मौत पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने चिकित्सक और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि इंजेक्शन लगाने पर मरीज की तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। 

किशननगर चौक निवासी रेवती रमन (25 वर्ष) पुत्र ओमप्रकाश की गुरुवार रात तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और तीव्र सिर दर्द की शिकायत पर दून अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। यहां पर ईएमओ डॉ. एचएस भाटिया ड्यूटी पर थे। उस समय युवक को ड्रिप लगा दी गई। आरोप है कि डॉक्टर ने परिजनों को बताया कि मरीज की स्थिति सामान्य है। रातभर युवक को केवल नर्स देखती रही। आरोप है कि कोई चिकित्सक मरीज को देखने नहीं आया। सुबह करीब पांच बजे जब तबीयत बिगड़ गई तो परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ को रेफर करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। 

कहा कि वह दस बजे तक रेफर नहीं किया गया। इसी बीच मरीज की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो नर्सिंग स्टाफ ने उसे इंजेक्शन लगा दिया। जिसके बाद और ज्यादा तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में डॉ. एचएस भाटिया को बुलाया गया, उन्होंने पंप किया लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी। युवक की मौत पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इमरजेंसी में स्ट्रेचर इधर-उधर फेंकने पर डॉक्टरों और स्टाफ में अफरातफरी मच गई। वह भाग खड़े हुए। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री और वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी मौके पर पहुंचे। 

उन्होंने परिजनों को समझाया और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। सूचना पर पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंच गई। इसी बीच परिजन युवक के शव को बिना पोस्टमार्टम घर ले गए। परिजनों ने बताया कि युवक हाल ही में सर्वे ऑफ इंडिया में संविदा की नौकरी पर लगा था। चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि युवक का क्रॉनिक एल्कोहल का केस था। रात में जब परिजनों ने उसे भर्ती कराया तो डॉक्टर ने उन्हें उनकी हालत के बारे में बता दिया था। 

फाइल में मृतक के भाई ने साइन भी किए हुए हैं। परिजनों को समझा-बुझाकर उन्हें पोस्टमार्टम कराने को कहा गया, लेकिन वह नहीं माने और शव को ले गए। वहीं, परिजनों ने अस्पताल के दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह क्रॉनिक एल्कोहल का केस नहीं था, उसे उल्टी और सिर में दर्द हुआ था। 

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Posted By: Raksha Panthari

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