Paper Leak Case: शुरू से ही सवालों के घेरे में थी असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन, 10 मिनट में भेजे थे 11 सवालों के जवाब
स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। खालिद द्वारा भेजे गए पेपर के े

आयोग की ओर से रायपुर थाने में असिस्टेंट प्रोफेसर सहित चार के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा। प्रतीकात्मक
जागरण संवाददाता, देहरादून। स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक प्रकरण में जितनी भूमिका खालिद की थी, उतनी ही सुमन की भी रही। इसके बावजूद पुलिस का सुमन के प्रति साफ्ट तारगेट नजर आया। क्योंकि खालिद ने पेपर अपनी बहन के माध्यम से सुमन को भिजवाया और सुमन ने बिना देखे-समझे पेपर के 11 सवाल 10 मिनट में हल करके वापस भी भेज दिए। उनकी यह तत्परता यह भी साबित करती है कि कहीं न कहीं इस मामले में सुमन की संलिप्तता है। सुमन ने पुलिस को बताया कि पेपर की दूसरी तरफ ओएमआर शीट देखने के बाद उन्हें पता चला कि यह पेपर चल रहा है, ऐसे में उन्होंने केवल अप्लीकेशन लिखी और उसे भेजने तक की जहमत नहीं उठाई।
21 सितंबर को आयोग की ओर से आयोजित की गई स्नातक स्तरीय परीक्षा के दौरान इंटरनेट मीडिया पर प्रश्नपत्र के आउट होने संबंध में जांच करने के लिए एसएसपी अजय सिंह की ओर से एसआइटी गठित कर जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए। प्रकरण में जांच में सामने आया कि परीक्षा प्रातः 11:00 बजे प्रारंभ हुई व 11 बजे से पूर्व पूरे प्रदेश में किसी भी प्रकार की नकल या पेपर बाहर आ जाने संबंधी सूचना सामने नहीं आई। करीब डेढ़ बजे इंटरनेट मीडिया पर परीक्षा के पेपर बाहर आने संबंधी कुछ पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किए जाने लगे। इस मामले में आयोग की ओर से रायपुर थाने में असिस्टेंट प्रोफेसर सहित सुमन चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अमरोडा डिग्री कालेज प्रतापनगर टिहरी गढ़वाल में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन के मोबाइल पर प्रातः 7:55 बजे खालिद के मोबाइल से वाट्सएप मैसेज आया कि उसकी बहन का पेपर है, उसकी मदद करनी है। इसके बाद 08:02 बजे सुमन ने ओके मैसेज किया। 11:34 बजे खालिद के नंबर से खालिद की बहनें साबिया व हिना की वाट्सएप पर काल आई। 11:35 बजे स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्न पत्र के तीन पेज की फोटो, जिसमें 11 प्रश्न थे, सुमन के मोबाइल पर प्राप्त हुए। सुमन ने प्रश्नों के उत्तर हाथ से लिखकर 11:45 बजे खालिद के मोबाइल नंबर पर वापस भेजे।
इसके बाद सुमन को कुछ शक हुआ और अपनी बहन सीमा से पूछा। उसकी बहन ने कहा कि उसके पास बाबी पंवार का नंबर है, उससे मालूम करने के लिए बताया और बाबी पंवार का नंबर भी दिया। सुमन ने किसी अधिकृत विभाग को सूचना देने के बजाय 12:21 बजे बाबी पंवार का नंबर मिलाकर उससे बात की और 12:28 बजे बाबी पंवार को तीनों पेजों के साथ ही हाथ से लिखे उत्तर वाट्सएप पर भेजे।
सात साल पहले संपर्क में आए थे सुमन व खालिद
असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन पेपर लीक का मास्टरमाइंड खालिद के संपर्क में सात साल पहले आई थी।टिहरी स्थित अमरोडा डिग्री कालेज प्रतापनगर टिहरी गढ़वाल में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात सुमन वर्ष 2018 में वह नगर निगम ऋषिकेश में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात थी। उस दौरान खालिद मलिक सीपीडब्ल्यूडी में संविदा पर जेई के पद पर नियुक्ति था और आलवेदर रोड का कार्य देख रहा था। उसी दौरान खालिद मलिक ने टेंडर के संबंध में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन से मुलाकात की थी, इसके बाद दोनों के बीच बातचीत होती रहती थी। वर्ष 2022 में सुमन का चयन डिग्री कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद हो गया, लेकिन उनके बीच बातचीत होती रहती थी।
बेराेजगार संघ के प्रदर्शन के बाद शुरू हुई सीबीआइ जांच
पेपर लीक प्रकरण में बेरोजगार संघ की ओर से परेड ग्राउंड के बाद धरना प्रदर्शन किया गया। कई दिनों तक प्रदर्शन करने के बाद चार अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धरनास्थल पर पहुंचे और सीबीआइ जांच की संस्तुति की। इस मामले में सीबीआइ की जांच प्रचलित है। जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती है।

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