जागरण संवाददाता, देहरादून : कृषि विकास के लिए देशभर में प्रसिद्ध गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय को राज्य में कृषि के समग्र विकास की जिम्मेदारी आगे बढ़कर निभानी होगी। विवि को राज्य की कृषि आय दोगुनी करके दिखानी होगी अभी आशा की जा सकती है कि 2022 तक किसानों की आय भी दोगुनी होगी। यह बात कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल (ओईसीडी) सीड सर्टिफिकेशन कार्यशाला के शुभारंभ पर कही।

कार्यशाला में कृषि मंत्री ने कहा कि पंतनगर कृषि विवि के पास उच्च तकनीकी, कृषि विशेषज्ञ, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिससे कृषि उन्नयन की आशा की जा सकती है। उन्होंने कहा कोई भी राज्य तभी कृषि आर्थिकी में मजबूत होगा, जब वहां गुणवत्ता युक्त प्रमाणीकरण बीज पर्याप्त मात्रा में तैयार हो रहे हों। उन्होंने कहा कि देखा जा रहा है कि कई बीज कंपनियां बाजार से साधारण बीज खरीदकर उस पर प्रमाणीकरण का लेबल लगाकर किसानों के बेच रहे हैं। इससे न केवल किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है बल्कि इससे बीज प्रमाणीकरण की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि आज देखने में आ रहा है कि बीज की कीमत एवं फसलों में भारी अंतर है। कहा कि कुछ समय पहले तक सरकारी क्षेत्र के बीज निगम बेहतर स्थिति में थे, लेकिन आज उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम (टीडीसी) के पंतनगर स्थित बीज विधायन संयंत्र करीब 50 करोड़ रुपये के घाटे में है। कहा कि बीच प्रमाणीकरण एवं जैविक कृषि की उन्नति के मामले में उत्तराखंड को तेलंगाना से सीख लेनी चाहिए। कार्यशाला में उत्तराखंड के अलावा हिमाचल, उत्तर प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर के कृषि विवि, बीच प्रमाणीकरण संस्थान, राष्ट्रीय बीज निगम एवं निजी बीज उत्पादक संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर तेलंगाना से बीज प्रमाणीकरण संस्थान के निदेशक के केशावुलु, डीके श्रीवास्तव असिस्टेंट कमिशनर (सीड) केंद्र सरकार आदि मौजूद रहे।

इनवेस्टर समिट से बड़ी संभावना

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में उत्तराखंड इनवेस्टर समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष देश-दुनिया के उद्यमी जब एक मंच पर होंगे तो इससे उत्तराखंड को लाभ मिलेगा। कृषि एवं पर्यटन के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं हैं। देवभूमि उत्तराखंड में निवेश करने के कई बड़े औद्योगिक घराने इच्छुक हैं। क्योंकि यहां आपराधिक गतिविधियां बेहद कम है। जो राज्य का मजबूत पक्ष है।

उत्तराखंड से योजना नहीं : अश्वनी

केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव (सीड) अश्वनी कुमार ने कहा कि कृषि प्रमाणीकरण के लिए आधारभूत ढांचा चाहिए होता है जिसके लिए केंद्र सरकार पूरी मदद देने को तैयार है, लेकिन उत्तराखंड से इस बारे में कोई प्रपोजल नहीं मिला है। राष्ट्रीय बीज निगम की ओर से राज्य के किसानों को नई उन्नत प्रजाति के बीच मुहैया करवाए जाएंगे और पारंपरिक फसलों के संरक्षण एवं उत्थान में भी किसानों का सहयोग किया जाएगा। कहा कि बीज प्रमाणीकरण लैब के लिए लाखों रुपये दिए जाते हैं। डीएनए फिंगर प्रिंट के लिए 70 लाख रुपये, बीज उत्पादकों को 70 फीसद तक सब्सिडी दी जा रही है। उत्तराखंड की राजमा, लाल चावल बेसकीमती हैं। जिसका उत्पादन बढ़ाना चाहिए।

Posted By: Jagran

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