देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश की साढ़े सात हजार से अधिक पंचायतों में क्या-क्या कार्य हो रहे हैं और कौन से काम प्रस्तावित हैं, अब तक हुए कार्यों की प्रगति क्या है, अहम प्रमाणपत्र जारी हो रहे हैं या नही, सोशल ऑडिट में किन कार्यों में गड़बड़ी पाई और इसमें विभागों ने क्या एक्शन लिया, ऐसे तमाम सवालों के उत्तर निकट भविष्य में एक क्लिक पर आपके सामने होंगे। पंचायतीराज विभाग ने इसके लिए राज्यभर में 778 कॉमन सर्विस सेंटर खोलने को केंद्र की एजेंसी से एमओयू पर साइन किया है। अब जल्द ही से सेंटर खुलेंगे, जो पंचायत के कार्यों से संबंधित डाटा पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

केंद्र सरकार का वर्तमान में पंचायतों पर खास फोकस है। इसके तहत त्रिस्तरीय पंचायतों (ग्राम, क्षेत्र व जिला) में होने वाले कार्यों में पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है। इस कड़ी में उत्तराखंड के पंचायतीराज विभाग ने भी कदम बढ़ाए हैं। अपर सचिव पंचायतीराज एचसी सेमवाल के अनुसार पंचायतों में होने वाले और अब तक हो चुके सभी प्रकार के कार्यों का डेटा पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कॉमन सेंटर खोले जाएंगे। इसके लिए एमओयू साइन हो चुका है।

अपर सचिव सेमवाल ने बताया कि राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हर न्याय पंचायत स्तर पर एक कॉमन सर्विस सेंटर का आग्रह किया गया है। राज्य में 670 न्याय पंचायतें हैं। हर न्याय पंचायत के केंद्र में यह सेंटर खुलेगा, ताकि उसके सभी गांवों का डेटा अपलोड किया जा सके। इसी प्रकार सभी 95 क्षेत्र पंचायत मुख्यालयों और 13 जिला मुख्यालयों में भी ये सेंटर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि पंचायतों में होने वाले कार्यों में पारदर्शिता के मद्देनजर यह एक अहम कदम होगा।

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इन एप्लीकेशन में अपलोड होगा डेटा

प्रिया सॉफ्ट, प्लान प्लस, लोकल गवर्नमेंट डायरेक्ट्री, नेशनल एसेट डायरेक्ट्री, नेशनल पंचायत पोर्टल, सोशल ऑडिट एंड मीटिंग मैनेजमेंट, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल, एरिया प्रोफाइलर, एक्शन सॉफ्ट, सर्विस प्लस, ट्रेनिंग मैनेजमेंट, ग्राफिक इन्फार्मेशन सिसटम व ऑडिट ऑनलाइन।

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