केदार दत्त, देहरादून। पर्वतीय जिलों के गांवों में विभागवार चल रही विकास और स्वरोजगारपरक योजनाओं की राह में क्या-क्या अड़चनें आ रही हैं, इसे लेकर जल्द ही तस्वीर साफ होगी। उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के अध्यक्ष डा एसएस नेगी ने आयोग के सभी पांच सदस्यों को इस सिलसिले में जिले आवंटित किए हैं। सदस्यों ने जिलेवार गांवों का भ्रमण शुरू कर दिया है। इस दौरान गांव लौटे प्रवासियों से भी स्वरोजगार के संबंध में विस्तृत चर्चा होगी। यह कार्य पूरा होने के बाद आयोग सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें तमाम सुझावों को समाहित किया जाएगा।

कोरोना संकट के चलते इस बार भी बड़ी संख्या में प्रवासी गांव लौटे हैं। इससे बंद पड़े घरों के ताले खुले हैं तो गांवों की रौनक भी लौटी है। गांव लौटे कई प्रवासियों ने स्वरोजगार में भी हाथ आजमाया है, मगर तमाम सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। इस सबको देखते हुए ही पलायन आयोग ने पर्वतीय क्षेत्र के गांवों का दौरा कर वहां चल रही विकास व स्वरोजगारपरक योजनाओं की राह में आ रही कठिनाइयों का अध्ययन करने की ठानी है। इस दौरान स्वरोजगार के क्षेत्र में सफल व्यक्तियों की कहानियां भी संकलित की जाएंगी, ताकि वे दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकें।

आयोग के सदस्यों को आवंटित जिले

  • सदस्य, जिले
  • रंजना रावत, रुद्रप्रयाग व चमोली
  • रामप्रकाश पैन्यूली, उत्तरकाशी व टिहरी
  • सुरेश सुयाल, पिथौरागढ़ व नैनीताल
  • दिनेश रावत, पौड़ी
  • अनिल शाही, अल्मोड़ा

डा एसएस नेगी (उपाध्यक्ष पलायन आयोग) का कहना है कि ग्रामीण आर्थिकी सुदृढ़ हो, स्वरोजगार बढ़े और पलायन कम हो, इसी के दृष्टिगत पर्वतीय जिलों के गांवों में आयोग के सदस्यों की अगुआई में टीमें भेजी गई हैं। सभी सदस्यों से भ्रमण रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को आयोग की ओर से ठोस सुझाव प्रस्तुत किए जाएंगे।

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Edited By: Sunil Negi