संवाद सूत्र, त्यूणी/चकराता: पहाड़ में बसे ग्रामीणों का जीवन पहाड़ सरीका है। इसकी एक बानगी प्रखंड से जुड़े बर्फबारी प्रभावित रजाणू गांव में देखने को मिली। बर्फबारी से बंद पड़े राष्ट्रीय राजमार्ग और संपर्क मार्ग की वजह से गरीब परिवार के एक दिव्यांग की पत्नी ने प्रसव के उपरांत समय रहते उपचार नहीं मिलने के कारण दम तोड़ दिया। करीब 24 वर्षीय प्रसूता की मौत से स्वजन को गहरा सदमा लगा है। घटना से गांव में मातम छा गया।

ग्रामीणों के अनुसार जौनसार के ऊंचाई पर बसे कांडोई-भरम क्षेत्र के बर्फबारी प्रभावित रजाणू निवासी दिव्यांग पंकज जोशी की पत्नी सविता देवी को बीते गुरुवार को प्रसव पीड़ा हुई। गांव की अन्य महिलाओं ने बर्फबारी के चलते क्षेत्र के मार्ग बंद होने से मजबूरन घर पर ही प्रसव कराया। प्रसूता ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उसकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। प्रसव के बाद महिला की हालत बिगड़ने से समय रहते उपचार नहीं मिला, जिस पर उसने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने कहा कि बर्फबारी प्रभावित इलाके में जीवन मुसीबत में कट रहा है। क्षेत्र के ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी के चलते पांच दिन से सभी मार्ग पूरी तरह बंद हो चुके हैं। ग्रामीणों की समस्या जानने और देखने वाला कोई नहीं है।

बताया जा रहा है बीते वर्ष दिव्यांग पंकज की माता का निधन होने से घर-परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी सविता के कंधों पर आ गई थी। पत्नी का साथ हमेशा के लिए छूटने से गमगीन पति और परिवार के अन्य सदस्य सदमे में हैं। चुनावी शोरगुल में गमगीन स्वजन के दर्द को समझने की किसी के पास फुर्सत तक नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर प्रसव के उपरांत महिला को समय रहते उपचार की सुविधा मिलती तो शायद उसकी जान बच जाती है। फिलहाल नवजात की हालत सामान्य बताई जा रही है।

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