v style="text-align: justify;">देहरादून, [जेएनएन]: प्रदेश में अब चिकित्सकों की कमी दूर होने की संभावनाएं नजर आ रही हैं। विभाग को इस बीते एक वर्ष में 584 चिकित्सक मिल चुके हैं। इससे अब इनकी कुल संख्या दो हजार पार कर गई है। विभाग में चिकित्सकों के 2700 से अधिक पद स्वीकृत हैं। चिकित्सा चयन बोर्ड की ओर से हाल ही में 712 पदों पर प्रवेश परीक्षा की गई है। इसमें भी 500 से अधिक चिकित्सक मिलने की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेजों से पास आउट होने वाले तकरीबन 200 नए चिकित्सकों के मिलने की संभावना है। इस तरह विभाग यह उम्मीद कर रहा है कि जल्द ही विभाग में चिकित्सकों की कमी दूर हो सकेगी। 

प्रदेश में अभी तक आई सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती चिकित्सकों की कमी को पूरा करना रहा है। विभाग के पास अभी तक स्वीकृत पदों के सापेक्ष तकरीबन एक तिहाई नियमित चिकित्सक ही मौजूद थे। हालांकि, संविदा चिकित्सकों की संख्या जोड़कर यह आंकड़ा 1447 पहुंच रहा था। इनमें डेंटल चिकित्सकों को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या 1550 बन रही थी।
बीते वर्ष सरकार ने चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए भर्ती प्रक्रिया के साथ ही अन्य कदम भी उठाए। इसमें वाक इन इंटरव्यू के माध्यम से 108 पद भरे गए। 317 बांड धारकों को वापस लाया गया और 149 डेंटल चिकित्सकों को नियुक्ति दी गई। इस तरह अब तक 584 चिकित्सक विभाग को मिल चुके हैं। इन नए चिकित्सकों को विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती दी है।
इसके अलावा चिकित्सा चयन बोर्ड ने 712 पदों के लिए प्रवेश परीक्षा कराई है। विभाग को उम्मीद है कि इसके सापेक्ष 500 से अधिक चिकित्सक मिल सकेंगे। अल्मोड़ा व श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से भी इस वर्ष तकरीबन 200 जूनियर डॉक्टर अपना कोर्स पूरा कर लेंगे। इन्हें भी विभाग ने सीधे नियुक्ति पर लेने की व्यवस्था की है। इन सब आंकड़ों को मिलाकर विभाग अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। 
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इस वर्ष 550 से अधिक चिकित्सकों की नियुक्ति की जा चुकी है। चिकित्सा चयन बोर्ड के जरिये भी परीक्षा हो चुकी है। सरकार की प्रयास जल्द से जल्द चिकित्सकों की कमी को पूरा करना है।

By Raksha Panthari