देहरादून, [जेएनएन]: प्रदेश के तमाम वैक्सीन स्टोर में अब लॉगर लगाए जाएंगे। अभी तक वैक्सीन के निर्धारित तापमान की रीडिंग डी-फ्रीजर और आइएलआर में रखे थर्मामीटर से की जाती है। लॉगर से यह जानकारी ऑनलाइन मिलेगी कि वैक्सीन निर्धारित तापमान में रखे हैं या नहीं। इससे कूलिंग के उतार-चढ़ाव की भी जानकारी मिलेगी। हर 10 मिनट में रीडिंग काउंट होगा। हर घटे कूलिंग की रिपोर्ट भी निकाली जा सकेगी।

करीब एक चौथाई टीके डॉक्टरों और मरीजों के पास पहुंचने से पहले ही या तो खराब हो जाते हैं या उनका असर समाप्त हो जाता है। ऐसे मुख्य रूप से खराब सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के कारण होता है। ज्यादातर टीके गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं। वह दो से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच ही उपयोगी बने रहते हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन का महत्वपूर्ण योगदान है।

इसी को देखते हुए अब प्रदेश में वैक्सीन की 'स्मार्ट' निगरानी अमल में लाई जा रही है। यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम की मदद से जिले में इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क (ई-विन) से वैक्सीन केंद्रों को जोड़ा जा रहा है। देश में यह योजना अभी 12 राज्यों में संचालित की जा रही है। उत्तराखंड इसे लागू करने वाला 13वां राज्य होगा। प्रदेश की बात करें तो यहां एक स्टेट वैक्सीन स्टोर है।

जबकि श्रीनगर, ऊधमसिंहनगर व अल्मोड़ा में तीन क्षेत्रीय केंद्र हैं। इसके अलावा समस्त जनपदों में वैक्सीन स्टोर हैं। ई-विन इंडिया सॉफ्टवेयर से लैस स्मार्ट फोन से केंद्र में वैक्सीन की उपलब्धता, कमी, वितरण, उपयोग सहित वैक्सीन का तापमान भी ऑनलाइन पता लग जाएगा। इससे वैक्सीन के खराब होने की संभावना न के बराबर रहेगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाईएस थपलियाल के अनुसार इस बावत प्रक्रिया चल रही है। इस योजना को चरणबद्ध ढंग से अमल में लाया जाएगा।

यह भी पढ़ें: 70 के दशक का ये बैटल टैंक अब रात में भी छुड़ाएगा दुश्मनों के छक्के

यह भी पढ़ें: डेंगू, मलेरिया के मच्छरों का काल है ड्रैगनफ्लाई

यह भी पढ़ें: ड्रोन है एयरस्पेस इंजीनियरिंग की आधुनिक तकनीक

Posted By: Sunil Negi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस