राज्य ब्यूरो, देहरादून। विषम भूगोल और 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में अब विभिन्न योजनाओं व परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रकरणों में तेजी आएगी। वन विभाग और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के रीजनल कार्यालय के मध्य इस बात पर सहमति बनी है। इसके लिए फाइलों का गंभीरता से अध्ययन कर इनका निस्तारण किया जाएगा। इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जो भी वन भूमि हस्तांतरित होगी, उसकी सीमाओं की अनिवार्य रूप से पिलरबंदी की जाएगी। साथ ही बांज के पेड़ों का कम से कम कटान किए जाने की आवश्यकता भी बताई गई।

उत्तराखंड बनने के बाद से राज्य में अब तक वन भूमि हस्तांतरण के मामलों में 777 सैद्धांतिक और 3659 विधिवत स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें मुख्य रूप से 2800 से अधिक सड़क संबंधी स्वीकृतियां हैं। वर्ष 2020-21 में 243 सैद्धांतिक और 116 विधिवत स्वीकृतियां जारी की गईं। बावजूद इसके बड़ी संख्या में सड़क, पेयजल समेत अन्य योजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रकरण अलग-अलग स्तरों पर लंबित हैं।

इस सबको देखते हुए हाल में वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के रीजनल कार्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक में इस मसले पर मंथन किया। भरतरी के मुताबिक रीजनल कार्यालय के अधिकारियों से पूछा गया कि भविष्य में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित मामलों में समय पर स्वीकृतियां हों, इसके लिए राज्य के स्तर से क्या-क्या प्रभावी प्रयास किए जाने आवश्यक हैं।

रीजनल कार्यालय के अधिकारियों ने साफ किया कि फील्ड स्तर पर प्रभागीय वनाधिकारियों व वन संरक्षकों द्वारा वन अधिनियम अंतर्गत गठित होने वाले प्रस्तावों पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। इससे इन प्रस्तावों पर केंद्र के स्तर से आपत्तियों की संभावना न के बराबर रहेगी। भरतरी ने बताया कि अब ये तय किया गया है कि केंद्र की ओर से जारी चेकलिस्ट के अनुरूप प्रस्तावों को सीरियल में लगाने के साथ आनलाइन अपलोड कर इनकी प्रतियां हार्ड कापी में भी उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्तमान में उपयोग की जा रही चेकलिस्ट से अनुपयोगी प्रारूपों को हटाया जाएगा, ताकि प्रक्रिया का सरलीकरण हो सके।

उन्होंने बताया कि सभी वनाधिकारियों से कहा गया है कि वे प्रस्ताव तैयार करते वक्त केएमएल फाइल का गहनता से अध्ययन करें। प्रयास ये हो कि वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मसलों में जल संरक्षण में सहायक बांज के पेड़ों का कम से कम पातन हो। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में मलबा निस्तारण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

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Edited By: Sunil Negi