देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में निजी स्कूलों को मान्यता देने में जिलों से लेकर शासन स्तर पर हीलाहवाली अब नहीं हो सकेगी। हर महीने के पहले बुधवार को शिक्षा मंत्री सचिवालय में बैठक कर मान्यता संबंधी प्रकरणों को तेजी से निपटारा करेंगे। वहीं, निजी स्कूलों से संबंधित अभिभावकों की शिकायतों की सुनवाई जिलों में मुख्य शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी और राज्य स्तर पर निदेशालय में दो अपर निदेशक की कमेटी करेगी। 

सचिवालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि निजी स्कूलों को मान्यता प्रकरणों की अनदेखी नहीं होगी। इससे विभाग के प्रति गलत धारणा पनपने का मौका मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में 114 प्रकरणों में 67 प्रकरणों में मान्यता प्रदान की गई है। 42 प्रकरण समिति ने स्थगित किए, जबकि पांच प्रकरण शासन स्तर पर विचाराधीन हैं।
वर्ष 2018-19 में विद्यालयी शिक्षा परिषद को प्राप्त मान्यता के 128 प्रकरण में 60 में मान्यता दी गई। 37 प्रकरण स्थगित और 31 प्रकरण लंबित हैं। इनमें शासन स्तर पर 13 प्रकरण लंबित हैं। 18 प्रकरणों पर जिला स्तर पर संस्तुति की जानी है। वर्ष 2019-20 में कुल 86 प्रकरणों में चार में मान्यता दी गई। 61 प्रकरण स्थगित किए गए। इनमें 21 प्रकरण शासन स्तर पर लंबित हैं। 
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में दो प्राथमिक, एक उच्च प्राथमिक, एक हाईस्कूल और एक इंटर कॉलेज को मॉडल घोषित किया गया है। इनमें शिक्षकों के रिक्त पदों पर गेस्ट टीचर की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के मानक तय हैं, लेकिन इसके आधार पर शिक्षक मिल नहीं पा रहे हैं। आगामी सात और आठ अप्रैल को प्रत्येक विद्यालय में प्रवेशोत्सव के जरिए छात्र-छात्राओं को दाखिले के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसी एक विद्यालय में वह भी जाएंगे।

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