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नौ से दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर नितिन नवीन, चुनाव की तैयारियों और विधायकों के प्रदर्शन की होगी समीक्षा

Published: Wed, 02 Sep 2026 01:51 PM (GMT+05:30)

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 9 और 10 सितंबर को उत्तराखंड दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे आगामी ...और पढ़ें

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव में हैट-ट्रिक लगाने के उद्देश्य से मैदान में उतर चुकी भाजपा की जमीनी तैयारियों को परखने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन नौ व 10 सितंबर को उत्तराखंड दौरे पर आ रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका प्रदेश का दूसरा दौरा होगा।

अपने पहले दौरे में उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में हारी 23 सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के साथ ही पार्टी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रवास बढ़ाने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में इस बार उनका दौरा संगठनात्मक और विधायकों के कामकाज की कसौटी पर समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के दूसरे दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पहले दौरे में दिए गए निर्देशों पर अब तक कितना अमल हुआ, इसकी जमीनी स्थिति की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ले सकते हैं। खासकर उन 23 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता, बूथ प्रबंधन, प्रवास कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान की प्रगति पर नजर रहेगी, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सफलता नहीं मिल पाई थी।

विधायकों के कामकाज की समीक्षा के लिहाज से भी उनका यह दौरा अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की ओर से विधायकों को लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन के सामने पार्टी विधायकों की सक्रियता और उनके क्षेत्रीय प्रदर्शन का फीडबैक रखा जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे में प्रदेश संगठन की चुनावी तैयारियों, आगामी कार्यक्रमों और कमजोर सीटों को मजबूत करने की रणनीति पर भी मंथन संभावित है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार दौरे का फोकस केवल संगठनात्मक संवाद तक सीमित न रहकर समीक्षात्मक अधिक रहेगा। राजनीतिक दृष्टि से नवीन का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले कमजोर मानी जा रही सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।