राज्य ब्यूरो, देहरादून

'मातृभाषा के संरक्षण-संव‌र्द्धन के लिए सभी को समर्पित भाव से आगे आना होगा। मातृभाषा में हमारी भावनाएं और संस्कार समाहित हैं। जब हम इसे जिंदा रखेंगे तो हमारे संस्कार, आचार-विचार भी भाषा के साथ-साथ जीवित रहेंगे।' विश्व मातृभाषा दिवस पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को अपनी मातृभाषा गढ़वाली में सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी ये भावनाएं व्यक्त कीं।

केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि मातृभाषा में शब्द संपदा है। रीति-रिवाज, आचार विचार व संस्कार, सब मातृभाषा के भीतर समाहित हैं। जब हम उस भाषा को बोलते हैं तो अपनत्व रहता है। उन्होंने कहा कि जब हम जन्म लेते हैं तो उसके पहले शब्द के साथ-साथ हमारा विकास होता रहता है। जब भाषा समृद्ध होगी तो विचार, व्यवहार भी समृद्ध होंगे और प्रखरता भी निखरकर सामने आएगी।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि देश में हजारों मातृभाषाएं हैं। 22 भारतीय भाषाओं में बहुत समृद्धता है। देशभर में बोली जाने वाली तमाम बोलियों और भाषाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये सभी बेहद समृद्ध हैं। उन्होंने सभी लोगों का आह्वान किया कि वे जीवन में अपनी मातृभाषा को प्रोत्साहन दें। साथ ही अपनी भाषा को बोलकर इसे और अधिक खूबसूरती दें।

Posted By: Jagran

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