रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। शिक्षा के नाम पर सियासत हो और पैठाणी का जिक्र न हो तो सब बेमायने है। पौड़ी जिले के थलीसैंण ब्लाक का यह क्षेत्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक का गृह क्षेत्र भी है। वर्तमान में पैठाणी में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत का नया घमासान देखने को मिल रहा है। इस क्षेत्र पर मजबूत पकड़ रखने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को हराकर विधायक बने डा धन सिंह रावत उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। व्यवसायी पृष्ठभूमि के गोदियाल ने इस क्षेत्र में पैठाणी महाविद्यालय खोला। पिछली कांग्रेस सरकार में वह महाविद्यालय का राजकीयकरण कराने में कामयाब रहे। सत्ता पर भाजपा काबिज हुई तो बतौर विभागीय मंत्री डा रावत ने पैठाणी में प्रदेश का पहला सरकारी व्यावसायिक महाविद्यालय स्थापित कराने में देरी नहीं की। चुनावी साल में यह महाविद्यालय शुरू होने जा रहा है। दो दिग्गजों की रस्साकसी में पैठाणी के पौ-बारह हैं।

मंत्रीजी के पाले में खिसकी गेंद

शिक्षा और युवा कल्याण दोनों महत्वपूर्ण विभाग हैं। इन दिनों दोनों आमने-सामने हैं। खास बात ये है कि दोनों विभागों के मंत्री एक ही हैं। शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा अभियान में आउटसोर्सिंग से भरे जाने वाले 374 पदों के लिए एजेंसी बदल दी। उपनल की जगह पीआरडी को आउटसोर्सिंग एजेंसी बनाया गया है। पीआरडी युवा कल्याण विभाग के मातहत काम करता है। इधर शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया, उधर पीआरडी ने हाथ खड़े कर दिए। दरअसल पीआरडी को आउटसोर्सिंग एजेंसी बनाने की कसरत लंबे अरसे से चल रही है, लेकिन ये अंजाम तक नहीं पहुंची। बाद में सरकार ने दो आउटसोर्सिंग एजेंसी के औचित्य पर विचार करने के बाद कदम पीछे खींच लिए। भर्तियों को लेकर बवाल खड़ा होने का अंदेशा ही पीआरडी की घबराहट की वजह है। लिहाजा ना-नुकुर जारी है। दोनों विभागों के मंत्री एक ही हैं, लिहाजा गेंद अब फिर मंत्रीजी के पाले में है।

दीपावली तक चमक उठेंगे सरकारी स्कूल

कोरोना की मार और सरकारी स्कूल बदहाल। ऊपर से चुनावी साल। सरकार सक्रिय हुई और समाधान हाजिर है। दीपावली से पहले प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक सभी साढ़े सोलह हजार सरकारी विद्यालयों की रंगत सुधारी जाएगी। फरमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का है, लिहाजा सरकारी मशीनरी तैयारी में जुट गई है। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले पूरे साल स्कूल नहीं खुले। देखरेख नहीं हुई तो सरकारी स्कूलों की रौनक गायब हो गई। पिछले साल इस मुद्दे पर जमकर सियासत भी हुई थी। विरोधियों ने बंद पड़े स्कूलों के फोटो खिंचवाकर जमकर इंटरनेट मीडिया के हवाले किए। मंशा भांपने के बाद सरकार अब सधे ढंग से आगे बढ़ रही है। जीर्ण-शीर्ण भवनों वाले स्कूलों का ब्योरा जुटाया गया है। इस दफा जिला योजना के बजट में स्कूलों की मरम्मत, पुताई, रंग-रोगन के लिए धन की व्यवस्था की गई है। सभी जिलाधिकारियों को स्कूलों को चमकाने का आदेश दिया गया है।

सिर्फ मान्यताप्राप्त आवाज ही सुनेगी सरकार

शिक्षा विभाग में गैर मान्यताप्राप्त और मान्यताप्राप्त संगठनों के बीच रार छिड़ गई है। दरअसल प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक अलग-अलग मामलों में पीड़ि‍त शिक्षकों ने मुख्य संगठनों से इतर संगठन बना लिए हैं। गैर मान्यताप्राप्त इन संगठनों का तर्क है कि मुख्य संगठन और उनके नेता अपने पसंदीदा मामलों को ही शासन और विभाग के समक्ष रख रहे हैं। उनकी आवाज दब रही है। उन्हें न्याय नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे संगठन अपनी मांगों को लेकर इंटरनेट मीडिया से लेकर विभिन्न मंचों पर आवाज बुलंद किए हुए हैं। मान्यताप्राप्त संगठनों को ये नागवार गुजरा। लिहाजा तुरंत उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से जारी फरमान उत्तराखंड शासन की नजर किया गया। शासन ने आदेश जारी कर उत्तरप्रदेश की तर्ज पर ही गैर मान्यताप्राप्त संगठनों से पत्राचार करने और उनके साथ बैठक करने पर तुरंत रोक लगा दी। इससे खलबली मची है। संगठनों में एकदूसरे को लेकर छींटाकशी चल रही है।

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Edited By: Sunil Negi