देहरादून, राज्य ब्यूरो। पूर्व पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू पर लगे आरोपों की जांच के लिए चार माह में अब तीसरी बार नए जांच अधिकारी की तलाश चल रही है। पूर्व जांच अधिकारी एसीएस रणवीर सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद जांच अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को सौंपी गई थी। अब उनके द्वारा जांच में असमर्थता जताने के बाद नए सिरे से जांच अधिकारी की तलाश की जा रही है।

पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू पर मार्च 2013 को वीरगिरवाली, राजपुर के आरक्षित वन क्षेत्र में भूमि को अवैध तरीके से खरीदने और पेड़ों के अवैध कटान के आरोप हैं। साथ में यह आरोप भी है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए वन अधिनियम के तहत सरकारी काम करने वाले अधिकारियों के कार्य में बाधा डाली। हालांकि ये आरोप डीजीपी रहते हुए उनके कार्यकाल के दौरान ही लगे थे, लेकिन तब सिद्धू पर लगे आरोपों की जांच नहीं हुई। उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले उन्हें 29 अप्रैल 2016 को चार्जशीट थमाई गई थी। इस वजह से उन्हें अभी तक पेंशन या सेवानिवृत्तिक देय भी नहीं मिले हैं। हालांकि सिद्धू ने अपने जवाब में चार्जशीट में लगाए गए तमाम आरोप को नकार दिया था।

इसके बाद शासन ने इस मामले में अपर मुख्य सचिव डॉ रणवीर सिंह को जांच अधिकारी नामित करते हुए रिपोर्ट मांगी। इस बीच पूर्व डीजीपी सिद्धू ने कैट की शरण ली। कैट में लंबे समय तक इसकी सुनवाई चली। इस बीच पूर्व डीजीपी की शिकायत पर जांच रोक दी गई। हालांकि, तब तक जांच पूरी हो चुकी थी और रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी जा चुकी थी लेकिन कैट में मामला चलने के कारण इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इसी वर्ष मार्च में कैट ने पूर्व डीजीपी की याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जांच की संस्तुति कर दी।

कैट में मामला समाप्त होने के बाद शासन ने अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह से इस जांच को पूरा करने का अनुरोध किया लेकिन डॉ. रणवीर सिंह ने तब अपने अल्प कार्यकाल का हवाला देते हुए जांच करने से इनकार कर दिया। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद शासन ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को इस मामले की जांच करने को कहा लेकिन उन्होंने भी कार्य की अधिकता का हवाला देते हुए इससे कदम पीछे खींच लिए। पूर्व डीजीपी की जांच वरिष्ठ आइएएस अधिकारी को ही करनी है, इसलिए अब नए जांच अधिकारी की तलाश चल रही है। माना जा रहा है कि अब संभवतया एसीएस ओमप्रकाश को यह जांच सौंपी जा सकती है। 

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