देहरादून, जेएनएन। देश में करीब 35 साल बाद शिक्षा नीति में हो रहे बदलाव को लेकर देहरादून के छात्र, अभिभावक और शिक्षक बेहद उत्साहित हैं। तीनों वर्गों का मानना है कि नई नीति में जो नए प्रावधान किए गए हैं, वह निश्चित रूप से आने वाले समय में एक बदलाव लेकर आएंगे। बच्चों का सही विकास और उनके सुदृढ़ भविष्य की नींव रखने में नई शिक्षा नीति कारगर साबित होगी।

केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिलने के बाद सभी राज्यों ने अपने अपने स्तर पर नई शिक्षा नीति लागू करने की कवायद शुरू कर दी है।  उत्तराखंड में भी शिक्षा विभाग में नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए एक कमेटी गठित की गई है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे भी लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों के साथ नई शिक्षा नीति को लेकर संवाद कर रहे हैं। 

प्रदेश में नई शिक्षा नीति के कौन से बिंदु कैसे लागू किए जाएं इसे लेकर प्रदेश भर के शिक्षकों से सुझाव भी मांगे गए हैं। नई शिक्षा नीति को लेकर निजी और सरकारी स्कूल भी उत्साहित दिख रहे हैं। जीजीआइसी राजपुर रोड की प्रधानाचार्य प्रेमलता बौड़ाई ने कहा कि शिक्षा नीति में बदलाव होना  एक सराहनीय पहल है। आधुनिक समय के हिसाब से नीति में कई बदलाव किए गए हैं जो भविष्य में छात्रों के लिए हितकारी साबित होंगे। उधर निजी स्कूलों की प्रोग्रेसिव प्रिंसिपल स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने भी शिक्षा नीति के बदलावों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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इनका कहना है

सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह का कहना है कि पिछले सात दशकों में हमारे देश में शिक्षा का विस्तार तो हुआ लेकिन शिक्षा में मानवीय मूल्यों की कमी लगातार रही। नई शिक्षा नीति में छात्र केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि व्यवहारिक जीवन  से जुड़े मूल्य भी सीख सकेंगे। निश्चिततौर पर इससे भारत फिर विश्व गुरु बनेगा। इसमें किए प्रावधान काबिले तारीफ हैं। 

केंद्रीय विद्यालय आइटीबीपी के प्रवक्ता एके श्रीवास्तव की मानें तो नई शिक्षा नीति क्रांति लेकर आएगी। इसमें 10 प्लस 2 का सिस्टम खत्म करने, शोध को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शोध संस्थान बनाने, कला, नृत्य सहित संस्कृति को पढ़ाई का हिस्सा बनाने के कदम सराहनीय हैं। इसका असर दिखने में थोड़ा समय जरूर लगेगा लेकिन देश में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार आएगा।

रेसकोर्स स्थित स्‍कूल की छात्रा सेजल का कहना है कि शिक्षा नीति में आधुनिक समय के हिसाब से बदलाव होने जरूरी थे। छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास को लेकर नई शिक्षा नीति में कई बदलाव किए गए हैं। अब छात्र -छात्राओं को अपने रुचिकर विषय पढ़ने की छूट रहेगी। सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन की परंपरागत बाध्यता खत्म कर एक बड़ा परिवर्तन किया गया है।

छात्रा सानिया का कहना है कि नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब बोर्ड को लेकर छात्रों और अभिभावकों के दिमाग से डर खत्म हो जाएगा। नौवीं कक्षा से ही विषय चुनने की आजादी देना भी बढ़िया बदलाव है। इससे छात्रों को अपने विषयों में पकड़ बनाने में मदद मिलेगी

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