देहरादून, जेएनएन। NEET UG Result 2020 मोहित, तमन्ना और साक्षी। ये किसी कहानी के किरदार नहीं, बल्कि वो होनहार हैं, जिन्होंने साधारण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टर बनने की पहली सीढ़ी, नीट में कमाल कर दिखाया है। सामान्य परिवारों से ताल्लुख रखने वाले यह बच्चे अपनी लगन व आत्मविश्वास के बूते हर चुनौती से पार पाना जानते हैं। यही जज्बा है जिसने इन्हें सफलता की राह दिखाई है।

चालक के बेटे ने पाया मुकाम

रुड़की के मकतूलपुरी निवासी मोहित पाल ने इस बार नीट में सफलता हासिल की है। वह भविष्य में मनोरोग विशेषज्ञ बनना चाहते हैं। मोहित के पिता प्रमोद पाल ट्रक चालक हैं और मां सरस्वती गृहणी। रुड़की के शिवालिक स्कूल से 12वीं करने के बाद मोहित दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने गए। पर मां नहीं चाहती थी कि बेटा इतनी दूर रहकर पढ़े। इस बीच मोहित को डेंगू हो गया और वह काफी वक्त तक सिविल अस्पताल रुड़की में भर्ती रहा। वहीं डॉक्टरों को देख उसको भी डॉक्टर बनने की ललक जगी। ऐसे में उसने इसी को अपना ध्येय बना लिया और कड़ा परिश्रम किया। इसी मेहनत के बूते उसने नीट में 526 अंक हासिल किए हैं।

(फोटो: मोहित पाल) 

मोटर मैकेनिक की बेटी तमन्ना बनेगी डॉक्टर

जीवन में सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके हौसले बुलंद और कठिन परिश्रम का जज्बा होता है। देहरादून के ब्रह्मपुरी निवासी तमन्ना मंसूरी भी उन्हीं में एक है। तमन्ना ने नीट में 602 अंक हासिल किए हैं। तमन्ना की तमन्ना स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ बनना है। वह लखनऊ के प्रख्यात केजीएमसी में दाखिला लेना चाहती हैं। तमन्ना ने बताया कि उनके पिता तस्लीम मंसूरी मोटर मैकेनिक हैं। वह डॉक्टर बनना चाहती थी पर परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। बहरहाल मेहनत के बूते उनके सपनों को मंजिल मिली।

( फोटो: तमन्ना मंसूरी) 

समस्याओं से जूझती साक्षी ने साकार किया सपना

कहते हैं कि सपनों को साकार करने के लिए कठिन प्रयास किए जाएं तो मंजिल मिल ही जाती है। कुछ ऐसा ही साबित किया है देहरादून के सुभाषनगर निवासी साक्षी मनकू ने। नीट में सफलता हासिल करने वाली साक्षी कार्डियक सर्जन बनना चाहती हैं। उनकी प्राथमिकता दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना है। साक्षी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया। वह बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुख रखती हैं और आर्थिक हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। पिता परिवार से अलग रहते हैं और मां राजरानी भी बीमार रहती हैं। उनकी बहन प्राची बच्चों को ट्यूशन पढ़ा किसी तरह परिवार चलाती हैं। इन हालात में डॉक्टर बनने का सपना देखना दूर की कौड़ी थी। पर साक्षी ने अपने परिश्रम के बूते यह कर दिखाया। उन्होंने नीट में 570 अंक हासिल किए हैं।

(फोटो: साक्षी मनकू)

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शिक्षक दंपती का बेटा डॉक्टर बनने की राह पर

दून के बंजारावाला निवासी उज्ज्वल ने भी नीट में सफलता हासिल की है। उनके पिता नरेश कुमार और मां सुषमा जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक है। पिता क्यारा में तैनात हैं तो मां गजा में। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लैंसडौन में आर्मी पब्लिक स्कूल से हुई है। बारहवीं में उनके 73 फीसद अंक थे। डॉक्टर बनने की ललक उनके मन में सवार थी। इससे पहले भी दो बार नीट दिया था, पर रैंक अच्छा नहीं आया। पर असफलता से सीख लेकर वह फिर आगे बढ़े और इस बार 545 अंक पाकर सफलता हासिल की।

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