राज्य ब्यूरो, देहरादून: राज्य के वंचित और गरीब तबके के तकरीबन एक लाख छात्र-छात्राओं को पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए पैसा नहीं मिल सका है। करीब छह करोड़ की राशि अभी इन छात्र-छात्राओं को मिलना शेष है। अलबत्ता, उत्तरप्रदेश के प्रकाशकों से सस्ती पाठ्यपुस्तकें मिलने से राज्य के छात्र-छात्राओं की बल्ले-बल्ले हो सकेगी। राज्य के सरकारी और सहायताप्राप्त अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठवीं के सभी छात्र-छात्राओं और कक्षा नौवीं से बारहवीं तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को मुफ्त पाठ्यपुस्तकों के एवज में उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिये पुस्तकों की धनराशि सीधे ट्रांसफर की जानी है। अब तक अधिकतर छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में डीबीटी के जरिये धनराशि भेजी गई है। केंद्र से धन मिलने की प्रत्याशा में राज्य सरकार ने अपने बजट से करीब 12 करोड़ रुपये डीबीटी में दिए हैं। बताया जा रहा है कि शैक्षिक सत्र शुरू होने के बावजूद अभी तकरीबन एक लाख छात्र-छात्राओं को डीबीटी की धनराशि मिलना शेष है। ये राशि मिलने के बाद ही उनके लिए बाजार से एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें खरीदना मुमकिन हो सकेगा। फिलहाल राज्य सरकार को डीबीटी की शेष करीब छह करोड़ की राशि के लिए केंद्र सरकार से धन मिलने का इंतजार भी है। समग्र शिक्षा अभियान की प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में प्रस्तावित बजट पर मुहर लग चुकी है। लेकिन, यह राशि अभी राज्य को मिलना शेष है। उधर, राज्य मंत्रिमंडल के लिए सरकारी व सहायताप्राप्त विद्यालयों में एनसीइआरटी की पाठ्यपुस्तकें मुहैया कराने के लिए उत्तरप्रदेश के प्रकाशकों की मदद लेने के विकल्प से अब तक किताबें नहीं ले सके आम छात्र-छात्राओं को राहत मिल सकती है। दरअसल, उत्तरप्रदेश में कक्षा नौवीं से बारहवीं तक एनसीईआरटी की किताबें एनसीईआरटी की कीमत से तकरीबन 50 फीसद सस्ती बताई जा रही हैं। ऐसे में उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं को भी यह लाभ मिल सकेगा।