देहरादून, रविंद्र बड़थ्वाल। प्रदेश में अच्छी शिक्षा देकर छात्रों का भविष्य संवारने के लिए खोले गए राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों के खुद का भविष्य 16 साल बाद भी अंधेरे में है। शिक्षकों के 46 फीसद पद रिक्त हैं। 13 में से सिर्फ पांच ही नवोदय विद्यालयों के पास अपने भवन हैं। इन विद्यालयों के सूरतेहाल से खफा मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की सख्ती के बाद शिक्षा महकमा जागा है। शिक्षकों की भर्ती के लिए अब सेवा नियमावली और भवनों को निर्माण को कार्यदायी संस्थाएं चयनित की जाएंगी। 

प्रदेश में 13 जिलों में नवोदय विद्यालय वर्ष 2003 से संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षा को नई दशा-दिशा देने को खोले गए इन विद्यालयों की खुद की दशा सुधारने की सुध अब तक किसी भी सरकार ने नहीं ली। वर्तमान में इन विद्यालयों में 2755 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षकों के हाल देखिए, 624 पदों में 286 रिक्त हैं। प्रतिनियुक्ति पर 130 शिक्षक हैं। मानदेय पर 208 शिक्षकों को तैनात किया गया है। 
इन विद्यालयों में शिक्षकों की स्थायी व्यवस्था के लिए सेवा नियमावली नहीं है। इस वजह से रिक्त पदों को भरना मुश्किल हो रखा है। मुख्य सचिव सेवा नियमावली नहीं बनाने पर नाराजगी जता चुके हैं। इसके बाद महकमा नियमावली बनाकर उसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखने की तैयारी कर रहा है। चार नवोदय विद्यालय के अपने भवन नहीं हैं।
चमोली, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों के नवो्दय विद्यालयों में बचे हुए निर्माण कार्यो के लिए नाबार्ड से फंडिंग की जाएगी। उत्तरकाशी जिले के विद्यालय के लिए भी प्रस्ताव नाबार्ड को भेजा जाएगा। भवनहीन विद्यालयों के लिए कार्यदायी संस्था तय नहीं है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम का कहना है कि इन विद्यालय भवनों के लिए कार्यदायी संस्था का चयन किया जा रहा है।

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