देहरादून, [केदार दत्त]: बाघ संरक्षण में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे उत्तराखंड में नंधौर राज्य का तीसरा टाइगर रिजर्व बनेगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) इसे लेकर पहले ही सैद्धांतिक सहमति दे चुका है। अब 15 जून को होने वाली राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में नए टाइगर रिजर्व पर मुहर लग सकती है। 

यही नहीं, टिहरी वन प्रभाग के अंतर्गत उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गंगी को कंजर्वेशन रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भी बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। इसके अस्तित्व में आने पर प्रदेश में कंजर्वेशन रिजर्व की संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। 

उत्तराखंड में प्रोजेक्ट टाइगर लागू होने के बाद बाघ के संरक्षण के प्रयासों में काफी तेजी आई और बाघों की संख्या के लिहाज से उत्तराखंड (361) देश में दूसरे स्थान पर है। विश्व प्रसिद्ध कार्बेट टाइगर रिजर्व की इसमें मुख्य भूमिका रही है। बाघ संरक्षण में मिली सफलता के बाद राजाजी नेशनल पार्क और उससे सटे क्षेत्रों को मिलाकर राजाजी टाइगर रिजर्व बनाया गया। 

इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं और वहां बाघों की संख्या 34 के लगभग है। बेहतर वासस्थल को देखते हुए पूर्व में राज्य में दो और टाइगर रिजर्व बनाने पर जोर दिया गया। नवंबर 2016 में हुई स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की बैठक में हल्द्वानी, तराई पूर्वी व चंपावत वन प्रभागों के कुछ हिस्सों को मिलाकर वर्ष 2012 में बने नंधौर अभयारण्य के अलावा उप्र पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उत्तराखंड में स्थित बफर जोन सुरई रेंज (तराई पूर्वी वन प्रभाग) को टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव रखे गए। फिर इन्हें एनटीसीए को भेजा गया। 

गत वर्ष एनटीसीए ने नंधौर और सुरई को टाइगर रिजर्व बनाने को सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। एनटीसीए की हरी झंडी के बाद अब प्रस्तावित नंधौर टाइगर रिजर्व का मसला मसला 15 जून को होने वाली राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। 

बोर्ड की मुहर के बाद विशेषज्ञ समिति इस रिजर्व के सीमांकन आदि का परीक्षण करने के साथ ही जनता के सुझाव लेकर रिपोर्ट देगी। फिर सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीवीएस खाती के मुताबिक नंधौर टाइगर रिजर्व के अलावा गंगी कंजर्वेशन रिजर्व का प्रस्ताव भी बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। 

उन्होंने बताया कि 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित टिहरी वन प्रभाग का गंगी क्षेत्र बुग्यालों, औषधीय पौधों, हिमालयन थार, भूरा भालू समेत अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। गंगी को कंजर्वेशन बनाने के लिए क्षेत्रीय ग्रामीणों ने भी सहमति दी है। इस क्षेत्र में गंगी गांव पड़ता है। 

नंधौर टाइगर रिजर्व का खाका 

प्रस्तावित नंधौर टाइगर रिजर्व में नंधौर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के कोर और बफर जोन को टाइगर रिजर्व में रखा जाएगा। इसमें 270 वर्ग किमी कोर और 578 वर्ग किमी क्षेत्र बफर जोन होगा। नंधौर क्षेत्र बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों के लिहाज से कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व की भांति समृद्ध है। 

सुरई पर बाद में होगा विचार 

राज्य में सुरई टाइगर रिजर्व का प्रस्ताव भी है। तराई पूर्वी वन प्रभाग की सुरई रेंज उप्र के पीलीभीत टाइगर रिजर्व का बफर है। इसे देखते हुए उत्तराखंड ने सुरई के साथ ही इससे सटी खटीमा व किलपुरा रेंज के 237 वर्ग किमी को मिलाकर नया टाइगर रिजर्व प्रस्तावित किया। यहां भी बाघों की अच्छी खासी संख्या है। बताया जा रहा कि इस रिजर्व का प्रस्ताव वन्यजीव बोर्ड की अगली बैठक में लाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: खुशखबरी: उत्तराखंड में इसबार बढ़ सकता है बाघों का कुनबा

यह भी पढ़ें: उच्च हिमालय में बाघ की दहाड़, यहां पहली बार आया नजर

यह भी पढ़ें: केदारनाथ में दूसरी बार कैमरे में कैद हुई दुर्लभ हिम लोमड़ी