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बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक सुरक्षा की ढाल बनी उत्तराखंड की 'नंदा गौरा योजना', 50 हजार से अधिक कन्याओं को मिला सीधा संबल

Published: Thu, 15 Oct 2026 11:56 AM (IST)

उत्तराखंड सरकार की 'नंदा गौरा योजना' बेटियों के सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जन्म से उच्च शिक्षा तक ₹62,000 की वित्तीय सहायता।

  2. लिंगानुपात सुधार, बाल विवाह रोकने में सहायक योजना।

  3. 50,000 से अधिक बेटियों को मिला योजना का लाभ।

डिजिटल टीम, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में बेटियों के सशक्तिकरण, उनके उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित 'नंदा गौरा योजना' एक नए सामाजिक बदलाव का आधार बन चुकी है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित यह योजना राज्य में बेटियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बालिकाओं को उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का संबल प्रदान कर रही है।

नंदा गौरा योजना का मूल उद्देश्य प्रदेश में घटते लिंगानुपात में सुधार लाना, बालिका भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना है। 

नंदा गौरा योजना से आ रहा बदलाव

उत्तराखंड सरकार द्वारा 'नंदा देवी कन्या धन योजना' और 'गौरा देवी कन्या धन योजना' का विलय कर 'नंदा गौरा योजना' की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत पात्र परिवारों की अधिकतम दो बालिकाओं को जन्म से लेकर उनकी शिक्षा तक दो महत्वपूर्ण चरणों में कुल ₹62000 की वित्तीय सहायता दी जाती है।

प्रथम चरण (कन्या शिशु के जन्म पर): बालिका के जन्म पर परिवार को ₹11,000 की सहायता राशि दी जाती है, ताकि प्रसव के बाद शिशु के पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में कोई कमी न रहे।

द्वितीय चरण (12वीं उत्तीर्ण करने पर): इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा पास करने के बाद आगे की उच्च शिक्षा (स्नातक या मान्यता प्राप्त डिप्लोमा) में प्रवेश लेने पर अविवाहित छात्रा को ₹51,000 की सहायता प्रदान की जाती है।
 
यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे लाभार्थी या उसकी माता के बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों पर बेटियों की पढ़ाई का आर्थिक बोझ खत्म होता है और लड़कियां बीच में पढ़ाई छोड़ने के बजाय कॉलेज स्तर की पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रोत्साहित होती हैं। 

 
धामी सरकार के सुशासन और पारदर्शी डीबीटी प्रणाली के चलते प्रदेश के हर जिले में इस योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है। वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में 50,000 से अधिक बेटियों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया जा चुका है और सरकार द्वारा सैकड़ों करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है।

अकेले वर्ष 2026 में ही हजारों नई पात्र छात्राओं और नवजात शिशुओं के परिजनों ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से योजना का लाभ उठाया है। 

राज्य में बेटियों के सशक्तिकरण और योजना की सफलता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में नंदा गौरा योजना के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित हो रही हैं। हमारा संकल्प है कि प्रदेश की हर बेटी को शिक्षा, सम्मान और प्रगति के समान अवसर मिलें, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकें।

समाज पर पड़ रहा सकारात्मक प्रभाव

नंदा गौरा योजना केवल एक वित्तीय मदद नहीं है, बल्कि इसने उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय अंचलों में सामाजिक बदलाव की एक नई बयार बहाई है। 
लिंगानुपात में सुधार: जन्म के समय वित्तीय प्रोत्साहन मिलने से बेटियों के प्रति रूढ़िवादी सोच में बदलाव आया है और कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगा है। 
 
बाल विवाह पर लगाम: 12वीं के बाद ₹51,000 की किश्त मिलने के लिए छात्रा का अविवाहित होना और आगे प्रवेश लेना अनिवार्य शर्त है, जिससे कम उम्र में बेटियों की शादी करने की प्रवृत्ति खत्म हुई है।
 
महिला साक्षरता और उच्च शिक्षा: आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होने वाली बेटियां अब बेझिझक कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में दाखिला ले रही हैं।

सपनों को मिले नए पंख

उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों की लाभार्थी छात्राओं और उनके अभिभावकों ने इस योजना को अपने जीवन में एक बड़ा संबल माना है।  
"12वीं पास करने के बाद मेरे परिवार के पास कॉलेज की फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। नंदा गौरा योजना के तहत मुझे ₹51,000 की आर्थिक मदद मिली, जिससे मैंने देहरादून के कॉलेज में बीएससी में एडमिशन लिया। यह योजना मेरे जैसी हजारों बेटियों के लिए उच्च शिक्षा का दरवाजा खोल रही है।" - अंजलि रावत (लाभार्थी छात्रा, पौड़ी गढ़वाल)
"बेटी के जन्म के समय ही ₹11,000 की राशि मिल जाने से हमें उसके लालन-पालन और पौष्टिक आहार की चिंता नहीं रही। सरकार की इस योजना ने हमें यह अहसास कराया है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार और राज्य का अभिमान है।" - ममता देवी (लाभार्थी की माता, अल्मोड़ा)