बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक सुरक्षा की ढाल बनी उत्तराखंड की 'नंदा गौरा योजना', 50 हजार से अधिक कन्याओं को मिला सीधा संबल
उत्तराखंड सरकार की 'नंदा गौरा योजना' बेटियों के सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ...और पढ़ें

HighLights
जन्म से उच्च शिक्षा तक ₹62,000 की वित्तीय सहायता।
लिंगानुपात सुधार, बाल विवाह रोकने में सहायक योजना।
50,000 से अधिक बेटियों को मिला योजना का लाभ।
डिजिटल टीम, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में बेटियों के सशक्तिकरण, उनके उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित 'नंदा गौरा योजना' एक नए सामाजिक बदलाव का आधार बन चुकी है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित यह योजना राज्य में बेटियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बालिकाओं को उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का संबल प्रदान कर रही है।
नंदा गौरा योजना का मूल उद्देश्य प्रदेश में घटते लिंगानुपात में सुधार लाना, बालिका भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना है।
नंदा गौरा योजना से आ रहा बदलाव
अकेले वर्ष 2026 में ही हजारों नई पात्र छात्राओं और नवजात शिशुओं के परिजनों ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से योजना का लाभ उठाया है।
राज्य में बेटियों के सशक्तिकरण और योजना की सफलता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में नंदा गौरा योजना के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित हो रही हैं। हमारा संकल्प है कि प्रदेश की हर बेटी को शिक्षा, सम्मान और प्रगति के समान अवसर मिलें, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकें।
समाज पर पड़ रहा सकारात्मक प्रभाव
सपनों को मिले नए पंख
"12वीं पास करने के बाद मेरे परिवार के पास कॉलेज की फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। नंदा गौरा योजना के तहत मुझे ₹51,000 की आर्थिक मदद मिली, जिससे मैंने देहरादून के कॉलेज में बीएससी में एडमिशन लिया। यह योजना मेरे जैसी हजारों बेटियों के लिए उच्च शिक्षा का दरवाजा खोल रही है।" - अंजलि रावत (लाभार्थी छात्रा, पौड़ी गढ़वाल)
"बेटी के जन्म के समय ही ₹11,000 की राशि मिल जाने से हमें उसके लालन-पालन और पौष्टिक आहार की चिंता नहीं रही। सरकार की इस योजना ने हमें यह अहसास कराया है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार और राज्य का अभिमान है।" - ममता देवी (लाभार्थी की माता, अल्मोड़ा)
