देहरादून, राज्य ब्यूरो। यदि आप प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र न होने के कारण भारी भरकम चालान कटने से डर रहे हैं तो आपके लिए राहत भरी खबर है। परिवहन विभाग अथवा पुलिस एक दम से आप पर जुर्माना नहीं लगा सकते। संशोधित परिवहन एक्ट की धारा-116 में यह साफ है कि यदि वाहन चालक के पास मौके पर प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र नहीं है तो उसे एक सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष इसे प्रस्तुत करना होगा। इस अवधि में वह नया प्रमाणपत्र भी बना सकता है। ऐसा न कर पाने की स्थिति में ही उसे चालान भुगतना पड़ेगा।प्रदेश में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम-2019 लागू हो गया है। नए अधिनियम में भारी भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही वजह है कि इन दिनों लोग बड़ी संख्या में लाइसेंस बनवाने, इंश्योरेंस कराने और प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र बनवाने को जुटे हैं। इसे लेकर संबंधित विभागों में खासी भीड़ उमड़ रही है। सबसे ज्यादा भीड़ प्रदूषण जांच केंद्रों में प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र बनवाने को लेकर लग रही है।

दरअसल, इस बार केंद्र ने प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र न होने पर 2500 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी कारण प्रदूषण जांच केद्रों में लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है। इसका एक कारण जांच केंद्रों की संख्या कम होना भी है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने हाल में कंपाउंडिंग की दरों में संशोधन का निर्णय लिया है। इसके साथ ही प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र और हेलमेट की अनिवार्यता की शर्त एक नवंबर से लागू की जाएंगी।

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परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत कैबिनेट ने विभिन्न दरों में कटौती की है। जल्द ही इस संबंध में शासनादेश जारी हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र और हेलमेट से संबंधित दरें एक नवंबर से लागू होंगी। शेष दरें शासनादेश जारी होते ही लागू हो जाएंगी। 

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