मसूरी में सीजन का पहला बड़ा ट्रैफिक, होटल 80% तक भरे; वाहनों की लंबी कतार
मसूरी में वीकेंड पर भारी ट्रैफिक जाम देखा गया। पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण शहर के प्रवेश मार्गों से लेकर प्रमुख स्थलों तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

वीकेंड पर मसूरी की रफ्तार थमी. Jagran

समय कम है?
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संवाद सहयोगी, मसूरी। वीकेंड शुरू होते ही मसूरी एक बार फिर भारी ट्रैफिक दबाव से जूझती नजर आई। शनिवार को सुबह करीब नौ बजे से शुरू हुआ जाम देर रात 11 बजे तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में बना रहा। रविवार को भी ऐसे ही हालात रहे।
शहर में प्रवेश मार्गों से लेकर मालरोड और प्रमुख पर्यटक स्थलों तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। सीजन का यह पहला बड़ा ट्रैफिक दबाव माना जा रहा है, जिसने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और व्यापारियों सभी की दिनचर्या प्रभावित की।
वाहनों की लंबी कतारें
सबसे अधिक दबाव मसूरी-देहरादून मार्ग पर दिखाई दिया, जहां बेलीब्रिज के दोनों ओर दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। इसका असर कोल्हूखेत स्थित ईको शुल्क बैरियर तक रहा, जहां कई बार वाहन रुक-रुककर चलते रहे। दोपहर में भगत सिंह चौक पर लगभग दो घंटे तक ऐसा जाम लगा कि पैदल चलने वालों को भी रास्ता निकालना मुश्किल हो गया।
शहर के भीतर सड़कों के किनारे अवैध रूप से खड़े दोपहिया व बड़े वाहनों ने ट्रैफिक दबाव को और बढ़ाया। लाइब्रेरी से किंक्रेग मार्ग तक रात देर तक वाहन रेंगते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि वीकेंड में पार्किंग प्रबंधन और पुलिस तैनाती पर्याप्त न होने से समस्या हर बार गंभीर हो जाती है।
पर्यटक स्थलों पर दिनभर भीड़
शनिवार को भट्ठाफाल, कैंपटीफाल, कंपनी गार्डन, जार्ज एवरेस्ट, गन हिल, लाल टिब्बा और धनोल्टी सहित सभी प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ रही। शाम ढलते ही माल रोड की रौनक और बढ़ गई। देर रात तक पर्यटक दून घाटी के रोशनी भरे नजारों का आनंद लेते रहे। होटल कारोबार पर भी इसका सीधा असर दिखा।
होटलों में 70 से 80 प्रतिशत तक आक्यूपेंसी
मसूरी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि शनिवार शाम तक शहर के होटल और गेस्ट हाउसों में 70 से 80 प्रतिशत तक आक्यूपेंसी दर्ज की गई, जो रात तक और बढ़ने की संभावना रही।
पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में यह दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग नियंत्रण और प्रवेश मार्गों पर अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत फिर से महसूस की जा रही है।
