जागरण संवाददाता, ऋषिकेश :

परमार्थ निकेतन आश्रम में 16वां दो दिवसीय वीणा महाराज संगीत महोत्सव के पहले दिन शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विद्याओं के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रविवार को परमार्थ निकेतन में 16वें वीणा महाराज संगीत महोत्सव की शुरुआत निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज व जीवा की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने दीप प्रज्वलित कर की। संगीत महोत्सव की पहली संध्या शास्त्रीय संगीत एवं देश का संगीत बना रहे कार्यक्रम को समर्पित की गयी। सभी कलाकारों ने मंत्र मुग्ध करने वाला संगीत प्रस्तुत किया। जिसे सुनकर सभी देशी विदेशी श्रद्धालु झूमने लगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारत की अनुपम देन है। आधुनिक काल में भारतीय संगीत के पुनरुत्थान का श्रेय विष्णु नारायण भातखंडे को दिया जाता है। भारत में संगीत सम्मेलनों के आयोजनों की नींव डालने का श्रेय भी इनका है। भारत में प्राचीन काल से ही संगीत का इतिहास समृद्ध रहा है। संगीत की इस प्रेरक और दैवीय प्रेरणा के सूत्रधार भगवान शिव और माता सरस्वती है। संगीत, मनुष्य के आतंरिक भावों की सुखद अभिव्यक्ति है, जिसका विकास मानवीय सभ्यता के विकास के साथ जुड़ा है। संगीत आत्मा की खुराक है जो जीवन को शांत और समृद्ध बनाती है। वीणा महाराज समिति के अध्यक्ष पं. हरि कृष्ण साह ने बताया कि शास्त्रीय संगीत के इस समारोह में भारत के विभिन्न प्रांतों से आये कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं।

इस अवसर पर उज्जैन से आये वोकल गायक पंडित योगेश देवले, दिल्ली से आई वोकल गायिका अदिति सरकार, मुंबई से आई वोकल गायिका विदूषी पूर्वी पारिख, दिल्ली से आये बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी, दिल्ली से आये सितार वादक डॉ. गोपाल कृष्ण शाह, दिल्ली से आये सितार और वायलीन वादक प्रोफेसर राजीव वर्मा, दिल्ली से आये पं संतोष नाहर, तबला वादक हितेंद्र श्रीवास्तव, हारमोनियम वादक गौरव बिष्ट, तबला वादक डॉ. विजय कृष्ण आदि ने प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर महानिदेशक सूचना दीपेंद्र चौधरी आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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